Home National News लोकतंत्र मजबूत करने को बढ़ती मतदाता जागरुकता और नागरिक सजगता…

लोकतंत्र मजबूत करने को बढ़ती मतदाता जागरुकता और नागरिक सजगता…

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सांकेतिक चित्र
भारतीय मतदाता संगठन देश का पहला अपने तरीके का संगठन है, जो मतदाता जागरुकता और नागरिक सजगता द्वारा भारतीय लोकतन्त्र को मजबूत करने का काम कर रहा है. संगठन लगातार बीते कई वर्षों से आवश्यक मतदान, मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने, मतदाता मित्र बनाने, स्वच्छ राजनीति को आगे बढ़ाने और भारत को अपराधमुक्त करने के लिए संकल्पित है.
डॉ. रिखबचंद जैन, फाईल फोटो
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव, बिहार के विधानसभा चुनाव, उत्तर प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव, हिमाचल प्रदेश के चुनाव और अब गुजरात के विधानसभा चुनाव में नागरिक सजगता और मतदाता जागरुकता बहुत स्पष्ट दिखाई दे रही है. जगह-जगह पर सामाजिक संस्थानों ने वोट देने के लिए प्रेरणास्पद बैनर, होर्डिंग, पोस्टर, वॉल पेन्टिंग आदि के माध्यम बढ़-चढ़कर आगे बढ़ाये हैं. असंतुष्ट मतदाताओं ने कॉलोनियों और सोसायटियों के गेट पर राजनैतिक पार्टियों और उम्मीदवारों को प्रचार करने से रोकने के लिए ‘नो एन्ट्री’ बोर्ड लगा दिए हैं. कई चुनाव क्षेत्रों में मतदाताओं ने ‘शुद्ध पानी नहीं तो वोट नहीं’, ‘फसल खरीद नहीं-फसल के दाम नहीं’ या ‘कर्ज माफ नहीं तो वोट नहीं’ इत्यादि के बैनर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया है.
जाम नगर में तो मिठाई व्यापारी हितेश भाई ने बेचे जाने वाले दूध के पेड़े पर ही लिख दिया ‘मतदान अवश्य करें’ इसकी चर्चा पूरे जाम नगर में ही नहीं बल्कि पूरे गुजरात में हो रही है. हितेश भाई और अजय चोटाई को इस शुभ काम के लिए बधाई. यह भी पढ़ें : अपराधमुक्त हो भारतीय लोकतन्त्र, पारदर्शी व्यवस्था के लिए जागें मतदाता 
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव लोकतन्त्र के महापर्व होते हंै. इसके बावजूद कुछ लोग उदासीन बने रहते हैं. अधिकतर लोग अपना वोट डालकर कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं. इसलिए चुनाव आयोग और पूर्व चुनाव आयोग भी बड़े स्तर पर मतदान कैम्पेन चलाता है. पिछले कुछ चुनाव से इसका असर भी दिख रहा है. लगभग हर चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ा है.
भारतीय मतदाता संगठन अखबार, पत्र-पत्रिकाएं, टी.वी. चैनल्स आदि के माध्यम से समय-समय पर निवेदन करता रहता है, कि मतदाता जागरुकता और लोकतन्त्र की मजबूती के लिए आवश्यक सामग्री मीडिया के इन प्रयासों से मतदाताओं को लोकतन्त्र के विषयों पर शिक्षित करने में मदद मिलती है. जिसके चलते मतदाता वोट डालने के लिए प्रोत्साहित होते हैं तथा वोट बेचने और प्रलोभन स्वीकार करने से दूर रहते हैं. यही लोकतन्त्र को मजबूत बनाने एवं जिन्दा रखने का एकमात्र तरीका है. प्रबुद्ध, सज्जन नागरिक इन विषयों पर अपना कर्तव्य संभालने के लिए तत्पर रहें तो लोकतन्त्र को कोई धनबल, बाहुबल नहीं हिला सकेगा.
जयहिन्द
(डॉ. रिखब चन्द जैन, लेखक भारतीय मतदाता संगठन के अध्यक्ष और टी.टी. ग्रुप के चेयरमैन हैं)

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