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नाम बदलने पर नहीं कायाकल्प करने पर ध्यान दें सरकारें

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नाम में क्या रखा है…क्या नाम बदलने से पहचान बदल जाएगी। ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि योगी सरकार मुगलसराय और फैजाबाद को नया नाम देने जा रही है। योगी सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय करने का प्रस्ताव रखा है वहीं फैजाबाद जनपद का नाम बदलकर अयोध्या रखने का विचार है।

भारत में किसी को बाकी जगहों का पता हो या नहीं…लेकिन मुगलसराय का नाम जरूर मालूम है। भारतीय रेल में सफर करने वाले हमारे जैसे लाखों लोग मुगलसराय जंक्शन से वाकिफ हैं। राष्ट्रवादी लोगों को योगी सरकार का ये फैसला भले ही ठीक लगे लेकिन हमारे जैसे लोगों का एक सवाल है। सवाल ये कि क्या मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने से उसका काया कल्प हो जाएगा…क्या सरकार हमें भरोसा दिलाएगी कि मुगलसराय में हमें कहीं गंदगी नहीं दिखेगी….क्या हमें इस बात का भरोसा मिलेगा कि वहां कोई यात्री जहरखुरानी का शिकार नहीं होगा…सवाल कई हैं लेकिन हमें इसका जवाब शायद ही मिले।

आपको याद होगा…कांग्रेस सरकार ने दिल्ली में कनॉट प्लेस का नाम बदलकर राजीव चौक और कनॉट सर्कस का नाम इंदिरा गांधी चौक कर दिया था…लेकिन आज भी 99 फीसदी लोगों की जुबान पर कनॉट प्लेस का ही नाम आता है। दिल्ली में करीब 20 साल गुजार चुके हमारे जैसे लोग अब भी सीपी ही बुलाते हैं।

जब एनडीएमसी ने दिल्ली के औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड रखने का फैसला किया था तो इस पर जमकर सियासत हुई थी। कांग्रेस हो या बीजेपी जिस पार्टी को जब भी मौका मिलता है वो अपनी विचारधारा हम जैसे लोगों पर थोप देती है। लेकिन नाम बदलने से किसी जगह का भला हुआ हो ये हमने आजतक नहीं देखा।

शेक्सपियर ने कहा था नाम में क्या रखा है…आज मैं भी अपने देश के हुक्मरानों से पूछ रहा हूँ वो बताएं नाम में क्या रखा है? क्या किसी का नाम राम रखने से वो भगवान राम की तरह व्यवहार करने लगा या उसके आचरण में बदलाव आ जाएगा… हरगिज नहीं…जिस निर्भया कांड को लेकर भारत समेत दुनिया भर में लोग सन्न रह गए थे…उस कांड के मुख्य आरोपी का नाम राम सिंह था। किसी का नाम कृष्ण होने से वो उनकी तरह व्यवहार नहीं करने लगेगा?

भारत में नाम बदलने को लेकर जिस तरह सियासत होती है वैसा शायद ही किसी मुल्क में होता हो….खुद को जनता का हिमायती बताने वाली हमारी सरकार जनता की भावनाओं का कितना ख्याल रखती है ये सभी को पता है। हमें अपने नेता को चुनने का तो अधिकार मिल गया लेकिन कनॉट प्लेस का नाम बदला जाए या नहीं इस पर कभी राय नहीं ली जाती।

भारत में सड़क से लेकर गली-मुहल्ले के नाम पर राजनीति होती है…कभी गांधी के नाम पर, कभी नेहरु के नाम पर तो कभी पटेल के नाम पर….इसमें कोई दो राय नहीं कि ये सभी हमारे हीरो थे…लेकिन क्या आजादी के बाद देश को बेहतर बनाने में नेताओं के अलावा किसी का योगदान नहीं रहा….समय आ गया है जब हमें इस बारे में सोचना होगा…अगर देश की तकदीर बदलनी है तो हमें हमारी सोच भी बदलनी होगी। सिर्फ नाम बदल देने से कोई फायदा नहीं होने वाला।

मनोज झा
(लेखक टीवी चैनल में वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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