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जीएसटी में 28 फीसदी कर की दर को लेकर है ज्यादातर बवाल, जीएसटी पोर्टल फेल होने के बाद टैक्स सुविधा केंद्र खोले जाने की मांग

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 01 नवंबर. कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स ने कहा है, कि हालांकि देश भर के व्यापारी जीएसटी को लागू करने हेतु सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं, लेकिन जीएसटी को लेकर व्यापारियों की दिक़्कतें रूकने का नाम नहीं ले रही हैं और इसी वजह से समर्थन के साथ-साथ व्यापारियों का जीएसटी प्रक्रिया का विरोध भी जोरों पर है. 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब पर जीएसटी की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाते हुए कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार से आग्रह किया है, कि इस स्लैब को नए सिरे से केवल विलासिता एवं नकारात्मक वस्तुओं तक ही सीमित रखा जाए. व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच यह स्लैब वास्तव में असंतोष की बड़ी जड़ है और ज्यादातर बखेड़ा इसी को लेकर है. यह भी पढ़ें : जीएसटी ढांचे की समीक्षा की मांग, अपंग जीएसटी अर्थव्यवस्था के लिए हितकारी नहीं  जीएसटी पोर्टल बुरी तरह फेल हो चुका है. इस दृष्टि से कैट ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि व्यापारियों को सहूलियत देने के लिए देश भर में व्यापारिक संगठनों के सहयोग से टैक्स सुविधा केंद्र भी खोले जाएँ.
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने 28 प्रतिशत की कर दर को गैर जरूरी बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ऐसी वस्तुएँ जो आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत हैं, उन्हें भी इस स्लैब में डाल दिया गया है. जिससे साफ जाहिर होता है, कि विभिन्न वस्तुओं को स्लैब में डालते हुए कोई मापदंड इस्तेमाल नहीं किया गया और मनमाने तरीके से कर दरें तय की गर्इं हैं. उन्होंने कहा कि यह सभी राज्य सरकारों की मिलीभगत का नतीजा है. व्यापारियों और उपभोक्ताओं की परेशानी से दूर ज्यादा राजस्व कैसे मिले उन्हें बस इसकी चिंता है, फिर भले ही जीएसटी का स्वरूप विकृत हो जाए.
विदित हो कि आॅटो स्पेयर पार्ट्स जो पहले पांच प्रतिशत में थे वो जीएसटी में 28% में, भवन निर्माण का अधिकांश सामान सीमेंट, बिल्डर हार्डवेयर,प्लाइवुड, बिजली का सामान, मार्बल आदि 28 प्रतिशत में हैं, जबकि प्रधानमंत्री लगातार कम कीमत की हाउसिंग की वकालत कर रहे हैं. और तो और बच्चों और महिलाओं के प्रोटीन एवं न्यूट्रीशियन उत्पाद भी इसी स्लैब में डालकर इन्हें बेहद महँगा कर दिया है, जो अब आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गए हैं.

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