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दिल्ली में पेड़ों के कटान पर ‘आप’ का दोहरा रवैय्या..

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सांकेतिक चित्र
प्रवीण श्रीवास्तव.
प्रदूषण से जूझती राजधानी दिल्ली में 17 हजार पेड़ों के काटे जाने पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. राजधानी दिल्ली की सत्ता पर आसीन आम आदमी पार्टी, केंद्र में भाजपा तथा विपक्ष में बैठी कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगाकर मामले की इतिश्री करने में लगे हैं. गौरतलब है, कि राजधानी में ढ़ाई करोड़ से ज्यादा लोग निवास करते हैं. घनी आबादी वाली दिल्ली में हरियाली की कमी के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा ही रहता है. जिसका खामियाजा दिल्लीवासी प्रदूषित हवा में सांस लेकर भुगतते हैं. राजधानी में प्रदूषण की भयावह स्थिति आंकड़ों के लिहाज से देखें तो डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 20 प्रदूषित शहरों में 13 शहर भारत के हैं, जिनमें दिल्ली पहले स्थान पर है. और दिल्ली में सालाना प्रदूषित हवा के कारण हो रही मौतों का आंकडा बढ़ता जा रहा है, जिनमें अधिकतर मौतें दिल की बीमारी और स्ट्रोक के कारण होती हैं. लेकिन सरकारों को इससे कुछ लेना-देना नहीं लगता है. इसलिए तो प्रदूषित वातावरण के बीच बहुमंजिला इमारत बनाने के लिए 17000 पेड़ काटने का ऐलान हो गया. हालांकि हाईकोर्ट ने 4 जुलाई तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी, लेकिन इस रोक के बावजूद भी दिल्ली में पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. रही-सही कसर सियासतदानों की सियासत पूरी कर रही है. राजधानी दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी इन पेड़ों के कटान का जिम्मेदार केंद्र सरकार को बता रही है. तो वहीं केंद्र में शासित भारतीय जनता पार्टी दिल्ली सरकार पर करोड़ों रुपए लेकर पेड़ काटने की परमिशन देने का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है. जिसके बाद से ‘आप’ के सुर नरम पड़ते दिखते हैं और यह सवाल खड़ा हो गया है, कि इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी दोहरा रवैय्या क्यूं अपना रही है? इस मुद्दे से जुड़े सवालों के जवाब के लिए हमने दिल्ली सरकार के विधायकों से बातचीत की.

नियमों के तहत हो रही पेड़ों की कटाई
शालीमार बाग से ‘आप’ पार्टी की विधायक वंदना कुमारी कहती हैं, कि पीडब्ल्यूडी विभाग के द्वारा जो पेड़ काटे जा रहे हैं, वह नियमों के तहत ही काटे जा रहे हैं, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो. इसमें सिर्फ उन पेड़ों को काटा जा रहा है, जो खतरनाक साबित हो सकते हैं और किसी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं. जहां तक प्रश्न 17 हजार पेडों के काटे जाने का है, आम आदमी पार्टी उसके खिलाफ है.
पेड़ों की कटाई में पीडब्ल्यूडी की कोई भूमिका नहीं
जनकपुरी से विधायक राजेश ऋषि कहते हैं, कि दिल्ली में पीडब्ल्यूडी द्वारा कहीं कोई पेड़ों की कटाई नहीं हो रही है. यह पेड़ों की कटाई सीपीडब्ल्यूडी के द्वारा हो रही है, जो केंद्र सरकार के अधीन है. वहीं दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने पेड़ों की कटाई के लिए किसी भी फाइल पर दस्तखत नहीं किए हैं. यह उपराज्यपाल द्वारा दी गई मंजूरी है, जिसको एनबीसीसी संस्था द्वारा 17000 पेड़ काटकर पूरा किया जा रहा है. जबकि दिल्ली सरकार तो खुद पेड़ों की कटाई के खिलाफ खड़ी है. तो ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत है कि दिल्ली सरकार ने पेड़ों की कटाई की मंजूरी दी है.

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