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परमार्थ निकेतन में पारस्परिक संवाद बैठक का आयोजन, गंगा के तट पर बही एकता और प्रेम की धारा

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संवाददाता.
ऋषिकेश. 13 दिसम्बर. परमार्थ निकेतन में यह ऐतिहासिक और वर्षों तक यादगार बना रहने वाला सुनहरा अवसर था, जब मन्दिरों के पुजारी, मस्जिदों के इमाम, गुरूकुलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी, मदरसों में पढ़ने वाले छात्र और विश्व स्तर के हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुुरूओं ने गंगा तट पर एकजुट होकर एकता, शान्ति, अमन, चैन, भाईचारा, पर्यावरण व जल संरक्षण का संदेश दिया.
परमार्थ गंगा के तट पर सुबह केसरिया और सफेद रंग का संगम लेकर आयी. केसरिया रंग में रंगे गुरूकुल के ऋषिकुमार और सफेद रंग के लिबास पहने मदरसों के प्यारे-प्यारे बच्चे एक साथ रहकर, साथ-साथ खाते-पीते एकता का संदेश दे रहे थे. पारस्परिक संवाद बैठक के दूसरे दिन कायसीड डॉयलाग सेन्टर के सदस्य डॉ. केजेविनो आरम, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती एवं कार्यक्रम निदेशक कायसीड डॉयलाग सेन्टर सैफुल्ला मंसूर ने हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरूओं का स्वागत और अभिनन्दन किया.
पारस्परिक संवाद बैठक का परिचय एवं उद्देश्य के विषय में कायसीड डॉयलाग सेन्टर के समन्वयक अधिकारी रेनाटा नेल्सन ने जानकारी प्रदान की. तत्पश्चात हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरूओं ने प्रेरक संदेश एवं उद्बोधन दिये. सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक पर्यावरण और जल प्रदूषण की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता तब तक हम विश्व शान्ति की स्थापना नहीं कर सकते. ये समस्यायें वैश्विक समस्यायें हैं, इनका समाधान भी वैश्विक स्तर पर ही सम्भव है. प्रदूषण और मौलिक समस्याओं के अभाव में व्यक्ति के जीवन में शान्ति का समावेश नहीं हो सकता. यह भी पढ़ें : सांझी विरासत पार्टी ने दिल्ली प्रदेश में कसी कमर, नए पदाधिकारियों की घोषणा की परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने संवाद बैठक को संबोधित करते हुए कहा, कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और देश के नवनिर्माण के लिये शिक्षा के साथ संस्कारों का होना नितांत आवश्यक है. शिक्षा और संस्कार के अभाव में हमारा युवा विचारहीनता और आदर्श शून्यता के भंवर में डूब सकता है. शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश कर समाज में आत्मचेतना, आत्मविश्वास और जागरूकता का समावेश किया जा सकता है. स्वामी जी महाराज ने कहा कि आज हमें ऐसी शिक्षा पद्धति की जरूरत है, जिससे बच्चे आत्मनिर्भर बनें. उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि सद्भाव, भाईचारा, वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना को आत्मसात कर देश की प्रगति में योगदान प्रदान करें.
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने राम मन्दिर मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि एक मिसाल हम कायम करें तथा समाधान की मशाल लेकर आगे बढ़ें तो अद्भुत कार्य हो सकता है. महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द महाराज ने कहा कि जिस प्रकार परमार्थ निकेतन में समता और समरसता की धारा बह रही है, ऐसी ही धारा यदि अयोध्या में श्रीराम मन्दिर बनाने के लिये भी बहे तथा मुस्लिम समाज आगे बढ़कर अपनी उदारता का संदेश दे तो विलक्षण कार्य हो सकता है.
मौलाना कोकब मुस्तबा ने कहा कि मोहब्बत के साथ रहना और शान्ति की स्थापना के लिये कार्य करना ही सच्ची इबादत है. शिक्षा चाहे मन्दिरों में दी जा रही हो या मस्जिदों में, इससे फर्क नहीं पड़ता है. फर्क इस बात से पड़ता है, कि हम अपने आने वाली पीढ़ियों को क्या बनाना चाहते हंै? हमारी शिक्षा शान्ति की स्थापना के लिये हो शक्ति प्रदर्शन के नहीं.
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि विश्वस्तरीय जल विशेषज्ञ कहते हैं, कि वर्ष 2040 तक पीने का पानी आधा रह जायेगा. ऐसी स्थिति में आगामी युद्ध जल के लिये हो सकता है. साथ ही कहा जा रहा है, कि आगामी समय में जल शरणार्थी की संख्या सबसे अधिक होगी. इन भयावह समस्याओं से निपटने के लिये हमें आज से ही कठोर प्रयास करने की जरूरत है.
प्रात:कालीन सत्र के पश्चात सभी धर्मगुरूओं एवं प्रतिभागियों ने परमार्थ निकेतन में रोपित सद्भाव और समरसता का प्रतीक पीपल, पाकड़ और बरगद के पौधों को जल अर्पित कर पर्यावरण संरक्षण और सद्भावना का संदेश दिया. सभी धर्मगुरूओं ने मिलकर विविधता में एकता, शान्ति और भाईचारे का संदेश प्रसारित करने हेतु रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया.
विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की पर्याप्त आपूर्ति होती रहे इसी भावना से विश्व जल का जलाभिषेक सभी हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरूओं और विद्यार्थियों ने किया.
कायसीड के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को खेल के माध्यम से शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व और विविधता में एकता को बढ़ावा देने वाले खेल खिलाये. इस आयोजन की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बताया. स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और हिन्दू-मुस्लिम धर्मगुरूओं ने दोनों सम्प्रदाय के विद्याथियों को रूद्राक्ष के पौधे भेंट किये ताकि वे मिलकर वृक्षारोपण करें. साथ ही यह संदेश दिया कि वे नफरत को अपने दिलों में जगह न दें तथा मोहब्बत, प्रेम, सद्भाव, समरसता, भाईचारे के साथ जीवन में आगे बढे़ं जिससे परिवार, राष्ट्र और विश्व में शान्ति स्थापित हो सके. ाले खेल खिलाये. इस आयोजन की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बताया. स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और हिन्दू-मुस्लिम धर्मगुरूओं ने दोनों सम्प्रदाय के विद्याथियों को रूद्राक्ष के पौधे भेंट किये ताकि वे मिलकर वृक्षारोपण करें. साथ ही यह संदेश दिया कि वे नफरत को अपने दिलों में जगह न दें तथा मोहब्बत, प्रेम, सद्भाव, समरसता, भाईचारे के साथ जीवन में आगे बढे़ं जिससे परिवार, राष्ट्र और विश्व में शान्ति स्थापित हो सके.

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