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बैद्यनाथ आयुर्वेद ने पेश की प्राकृतिक इम्यूनिटी बढ़ाने वाली अमृत तुलसी

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 08 जून. आयुर्वेद के क्षेत्र की सौ साल पुरानी भरोसेमंद और अग्रणी कंपनी बैद्यनाथ ने नये उत्पाद के तौर पर अमृत तुलसी पेश की है. 700 नुस्खों के खजाने वाली और आयुर्वेद उत्पादों की सबसे बड़ी निर्माता झांसी की बैद्यनाथ की तुलसी अमृत संक्रमण, सांस की दिक्कतों, पाचन, हृदय तथा त्वचा विकारों को रोकने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है.
बैद्यनाथ आयुर्वेद के कार्यकारी निदेशक अनुराग शर्मा ने कहा, कि बैद्यनाथ ने हमेशा आयुर्वेद तथा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के गुणों में भरोसा किया है. और वह आयुर्वेद के वही जांचे-परखे लाभ आधुनिक तथा सुविधाजनक रूप में प्रदान करने वाले उत्पाद तैयार करने में जुटी रही है. पवित्र तुलसी अमृत की बूंदों का सत या तुलसी अमृत उसी रणनीति के तहत पेश किया गया है. शर्मा ने कहा कि तुलसी भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे प्रमुख औषधीय जड़ियों में है और अपने असरकारी तथा जाने-माने लाभों के कारण पूजनीय भी है. यह भी पढ़ें : नालों से गाद निकाले जाने को लेकर महापौर की अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक शर्मा ने कहा, कि बैद्यनाथ रिसर्च फाउंडेशन ने ‘अमृत तुलसी’ नाम का नया उत्पाद उतारा है, जिसमें 5 प्रकार की पवित्र तुलसी, श्वेत तुलसी, कृष्ण तुलसी, राम तुलसी, सफेद वन तुलसी और काली वन तुलसी का सत है. उन्होंने कहा कि बैद्यनाथ तुलसी अमृत तुलसी की 5 प्रकार की पत्तियों के शुद्ध रस से बना है. तुलसी अमृत की दो बूंद बनाने में तुलसी की 500 पत्तियां लगती हैं. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजूबत करने में मदद करता है. तुलसी अमृत रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में, संक्रमण रोकने में, श्वसन, पाचन, हृदय एवं त्वचा विकारों का उपचार करने में सहायक है. यह नकारात्मकता दूर करती है और आपको फिट एवं सेहतमंद बनाती है. बार-बार आसवन से इसकी आयु एवं गुणों में वृद्धि ही नहीं होती बल्कि इसका प्रभाव एवं क्षमता भी बढ़ जाते हैं. इसीलिए ‘अमृत तुलसी’ बहुत गाढ़ी होती है और दिन में तीन-चार बार एक गिलास पानी में इसकी केवल 1-2 बूंदें लेने की सलाह दी जाती है.
गौरतलब है, कि अमृत तुलसी का प्रयोग जून और जुलाई के महीनों में मौसम बदलते समय होने वाले संक्रामक रोगों में विशेष तौर पर होता है, जब जलवायु कभी गर्म और कभी बारिश के कारण ठंडी रहती है. इस मौसम में सूक्ष्मजीवों के निष्क्रिय बीजाणु सक्रिय हो जाते हैं और विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैलाते हैं.

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