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संतुलित रवैय्ये से निकलेगा सीलिंग का समाधान, अनियोजित विकास ने पैदा की परेशानियां

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राजधानी में सीलिंग की प्रक्रिया से व्यापारी वर्ग बेहद परेशान है. तमाम तरह के आश्वासनों और राजनैतिक दलों के समर्थन के बावजूद व्यापारियों की परेशानी जस की तस है. राजधानी की प्रतिष्ठित और पुरानी दिल्ली मर्केन्टाईल एसोसिएशन के अध्यक्ष व्यापारी नेता सुरेश बिंदल सीलिंग प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं.

मास्टर प्लान के लागू होने में देरी मूल वजह
बिजनेसमैन के लिए व्यावहारिक तौर पर स्थिति बेहद खराब है, आज वह कहीं का भी नहीं है. स्थानीय सरकारों, संबंधित एजेंसियों समेत सुप्रीम कोर्ट का रूख भी व्यापारी के खिलाफ ही है. सबसे बड़ी परेशानी यह है, कि 2001 में जो मास्टर प्लान आना था वह 6 साल की देरी के बाद 2007 में आया. और उससे भी दुखद यह कि उस 2007 के मास्टर प्लान को अब 2017 में लागू करने की कोशिशें हो रही हैं. व्यापारियों का कानून का पाठ पढ़ाने वाला सुप्रीम कोर्ट 2007 के मास्टर प्लान को 2017 में लागू करने वाले अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर इतना ही कठोर रूख नहीं अपना रहा, जिनकी लेट-लतीफी के चलते ये हालात पैदा हुए हैं.
संबंधित एजेंसियों की गलती की सजा व्यापारी को क्यों
अगर एक कॉलोनी कहीं बसी तो उसमें तमाम बुनियादी सुविधाएं दी गर्इं. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वहां पर एक मार्किट तैयार हो गई. जहां भी कहीं आबादी है वहां मार्किट होगी और दुकानें होंगी. अव्यवहारिक कानून होंगे तो टूटेंगे ही. फिर उन तमाम ऐसी एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई क्यूं नहीं होती, जिनकी गलती से यह सब हालात बने हैं. संबंधित एजेंसियों की गलती की सजा सिर्फ व्यापारी को क्यूं दी जा रही है. यह भी पढ़ें : भगवान की शरण में राजधानी के व्यापारी, सीलिंग से मुक्ति के लिए करेंगे भगवान शिव का रुद्राभिषेक 
राजनीतिक दलों का समर्थन बेमानी
बेशक हमें राजधानी के सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है, लेकिन इसके कोई बहुत ज्यादा मतलब निकालना ठीक नहीं है. जहां भी कहीं भीड़ होती है, राजनैतिक दल वोटर तलाशने वहां पहुंचते हैं. लेकिन उनकी उपस्थिति से कोई समाधान निकलेगा ही, यह जरूरी नहीं है.
समझनी होगी व्यापारी की पीड़ा
राजनीतिक दलों, संबंधित एजेंसियों और माननीय न्यायालय को भी व्यापारी की यह पीड़ा समझनी होगी, कि व्यापारी कोई दूसरे ग्रह से आया हुआ जीव नहीं है. हाल-फिलहाल आश्वासन ही हमारे पास हैं और हम उम्मीद कर रहे हैं, कि निकट भविष्य में चीजें संतुलित होंगी. लेकिन ऐसे अव्यवहारिक कानून और अव्यवहारिक विकास जहां भी होगा, वहां इस तरीके की समस्याएं आती रहेंगी. सरकारों और संबंधित एजेंसियों को समझना होगा कि इस तरीके का बेतरतीब विकास बार-बार परेशानियां पैदा करता रहेगा. लिहाजा एक संतुलित रवैया अपनाए जाने की जरूरत है, ताकि एक संतुलित समाधान निकाला जा सके.

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