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भारतीय मतदाता संगठन की कार्यकारिणी बैठक आयोजित

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Dr. Rikhab Chand jain, File Photo
संवाददाता.
नई दिल्ली. 16 सितंबर. भारतीय मतदाता संगठन की कार्यकारिणी की एक आवश्यक बैठक बीते मंगलवार 11 सितम्बर को संगठन के संस्थापक ट्रस्टी डॉ. रिखबचन्द जैन की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में संगठन के विमल वधावन, राजेन्द्र स्वामी, विपिन गुप्ता, रमाकान्त गोस्वामी, ललित गर्ग और वेंकेंटेश गुप्ता सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे. बैठक में पिछले महीने हुई कार्यवाही का ब्यौरा देते हुए विमल वधावन ने कहा कि 2019 के चुनाव को देखते हुए भारतीय मतदाता संगठन को एक बड़ी भूमिका निभाने की आवश्यकता है. इसके लिए संगठन और स्वयंसेवकों को आगे लाना है. डॉ. रिखबचन्द जैन ने बैठक में बताया कि राजसमन्द, राजस्थान के दिव्यांग बच्चों ने मतदान जागरुकता रैली निकाली है और उन्हें संगठन के अगले वार्षिक कार्यक्रम में सम्मानित करने का निर्णय किया गया है. श्री जैन ने कहा कि निशक्त लोगों ने सशक्त लोगों को यह सन्देश दिया कि सशक्त लोगों को क्या करना चाहिए! डॉ. जैन ने कहा कि पंजाब सरकार की पूर्व मंत्री और समाजसेविका श्रीमती लक्ष्मी कान्ता चावला के अनेक लेख जैसे ‘राजनीतिक शुचिता के बिना भ्रष्टाचार मुक्त देश सम्भव नहीं’ निर्भीकता के साथ प्रकाशित होते रहते हैं और वह गरीबों और अपराधमुक्ति के लिए अच्छा काम कर रही हैं. उन्हें अगले वर्ष के ‘लोकतन्त्र महाप्रहरी’ सम्मान के लिए अनुमोदित किया गया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि आपराधिक प्रत्याशी पार्टी के चिन्ह से चुनाव न लडेÞं और ऐसे प्रत्याशी निर्दलीय तौर पर ही चुनाव लडेÞं. इसी विषय को भारतीय मतदाता संगठन को आगे ले जाना है. अगर ऐसा सम्भव हो जाये तो यह संगठन का एक अहम कदम होगा. डॉ. जैन ने कहा कि बार एसोसिएशन के विजय सिंह ने भारतीय मतदाता संगठन के विधिक मामलों में बड़ी मदद दी है एवं संगठन के कार्यों की सराहना की है.  यह भी पढ़ें : बालाजी निरोगधाम सेंटर में पंजाबी बाग फ्रेंड्स ग्रुप के सदस्यों ने किया फन योगाउनकी अध्यक्षता में वकीलों और रिटायर्ड जजों का एक सम्मेलन करने का विचार किया गया है, जिसके लिए समय और स्थान का संयोजन करने की जिम्मेदारी विमल वधावन और विपिन गुप्ता को दी गई है. कार्यकारिणी के एक महत्वपूर्ण एजेन्डे में अश्विनी उपाध्याय द्वारा व्यक्तिगत कारणों से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने में असमर्थता व्यक्त करने के चलते उन्हें इस पद से पदमुक्त करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया. साथ ही दूसरे महत्वपूर्ण प्रस्ताव में संस्था के संस्थापक रिखबचन्द जैन से अनुरोध किया कि वे पुन: अध्यक्ष पद स्वीकार करें, जिसे डॉ. जैन ने स्वीकार कर लिया.

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