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भ्रष्टाचार से लड़ाई के बड़े-बड़े दावे, लेकिन सुधर नहीं रही निगम की छवि..!

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सांकेतिक चित्र
पिछले तमाम आरोप-प्रत्यारोपों के बीच राजधानी दिल्ली के निगम की सत्ता में भाजपा ही तीसरी बार काबिज हो गई. प्रधानमंत्री मोदी की छवि के नीचे निगम को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे किये गये. लेकिन लगभग छह महीने के शासन के बाद दिल्ली नगर निगम न तो दिल्ली की छवि बदलने में कामयाब हुआ और ना खुद अपनी! भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोपों से घिरे निगम में भ्रष्टाचार को लेकर कैसा जीरो टॉलरेंस इस नई निगम की सरकार में है, इसका हालिया नजारा दिल्ली के नरेला जोन में देखने को मिला, जहां पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नरेला जोन में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता कुलभूषण को 75000 रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. ऐसे में सवाल उठता है, कि क्या नगर निगम में नई सरकार आने के बाद भी भ्रष्टाचार के हालात जस के तस हैं और इन हालात में कोई भी राजनैतिक दल कैसे करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की बात कर सकता है? इस मुद्दे पर हमने कई निगम पार्षदों से बात की, कि वे इस विषय पर क्या राय रखते हैं?

काम जल्दी कराने के लिए होता है भ्रष्टाचार
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड नंबर 83 सिविल लाइन से भारतीय जनता पार्टी के निगम पार्षद अवतार सिंह कहते हैं,
avtaar singh
कि भ्रष्टाचार के पीछे की असली वजह काम जल्दी करवाना होता है. जनता भी अपने काम को जल्दी करवाने के लिए रिश्वत की पेशकश करती है, जिसके चलते भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी होती है. वह कहते हैं, कि सभी आसान तरीके से अपना काम करवाना चाहते हैं, लेकिन यह गलत है. जो भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. निगम पार्षद ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए अधिकारी पर जानकारी न होने की बात कहकर बात टाल दी.
सभी राजनीतिक दलों में है भ्रष्टाचार
Ravinder Kumar
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड नंबर 84 तुर्कमान गेट से भाजपा के निगम पार्षद रविंद्र कुमार कहते हैं, कि भ्रष्टाचार में ना केवल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, बल्कि राजनीतिक पार्टियां भी इसका हिस्सा हैं. वह कहते हैं, कि फुटपाथ पर जितनी भी रेहड़ी-पटरियों की दुकानें लगी रहती हैं, यदि उन्हें हटा दिया जाए तो पुलिस वालों को रिश्वत कहां से मिलेगी. पार्षद पुलिस और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की असली वजह को जनता की मुसीबतों का फायदा उठाना बताते हुए कहते हैं, कि ताली एक हाथ से नहीं बजती. सच यह है, कि सभी दलों में भ्रष्टाचारी हैं.
मौजूदा सरकार में भ्रष्टाचार हुआ कम
Rajesh Kumar
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के ही वार्ड नंबर 92 देव नगर से भाजपा के निगम पार्षद राजेश कुमार मोदी सरकार के दौरान भ्रष्टाचार में कमी आने की बात कहते हैं. राजेश कुमार कहते हैं, कि जबसे केंद्र में मोदी सरकार आई है, भ्रष्टाचार की जड़ें कमजोर पड़ी हैं. वह कहते हैं, कि इस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचाररोधी कानूनों को कड़ा किया गया है, साथ ही यदि कोई भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है तो उस पर कार्यवाही की गई है. निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर राजेश बस इतना कहते हैं, कि शपथ लेते समय ही भ्रष्टाचार ना करने की भी शपथ ली जाती है.
डिजिटलाइजेशन के चलते कम हुआ भ्रष्टाचार
Aadesh Kumar
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड 98 से निगम पार्षद आदेश कुमार गुप्ता भी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं. वह कहते हैं, कि मोदी सरकार के तहत अधिकतर चीजें डिजिटलाइज हो गई हैं, जिसकी वजह से सभी तरह के काम आॅनलाइन हो रहे हैं, जिनमें भ्रष्टाचार हो ही नहीं सकता. निगम पार्षद मौजूदा निगम सरकार में भी भ्रष्टाचार को पहले से कम बताते हैं और कहते हैं, कि पिछले साल के मुकाबले इस साल भ्रष्टाचार काफी कम हुआ है.
अफसरशाही पर कसा शिकंजा
Sunita
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड नंबर 99 मोतीनगर की निगम पार्षद सुनीता निगम में जारी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहती हैं, कि उन्होंने तो अपने क्षेत्र में कम से कम अफसरशाही पर पूरा नियंत्रण बनाकर रखा है. वह कहती हैं, कि हम क्षेत्र में जनता को भी जागरुक करते हैं तथा उन्हें बताते हैं, कि यदि कोई भी निगम अधिकारी या कर्मचारी उनसे कोई अनैतिक मांग रखता है तो तुरंत उनको बताया जाए. निगम पार्षद कहती हैं, कि यदि जनता किसी भी अधिकारी को रिश्वत देती है, तो यह उनकी भी गलती है. हालांकि जब हमने उनसे पूछा कि वह अधिकारियों पर किस प्रकार का नियंत्रण बनाकर रखती हैं, तो पार्षद ने खुद को अनुभवहीन बताते हुए कहा कि वह धीरे-धीरे अफसरशाही को समझने और कंट्रोल करने की कोशिश कर रही हैं.

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