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व्यापारियों को सीलिंग से राहत नहीं, अवैध निर्माण भी जारी, भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री मोदी से की शहरी विकास मंत्री बदलने की मांग

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 15 दिसंबर. एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने सीलिंग से कराहती दिल्ली को एक साल में भी राहत दे पाने में विफल रहे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की निंदा करते हुए कहा है, कि नगर निगम पीपुल्स फ्रेंडली की जगह करप्शन फ्रेंडली साबित हुए हैं और डीडीए व एलएंडडीओ की नाकामी के चलते हजारों की संख्या में कारोबार सील होने से व्यापारी व उद्यमी ही नहीं कर्मचारी व उत्पादक भी बेरोजगारी व आर्थिक तंगहाली के शिकार हुए हैं. उन्होंने कहा कि व्यापारियों व उद्यमियों को सीलिंग से मुक्ति नहीं मिली, दिल्ली अधिक अनियोजित शहर के रूप में परिवर्तित हो गया है तथा दिल्ली के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने वाले
jagdish mamgain. Bjp Leader
दबाव से बचाने तथा प्रदूषण व पर्यावरण की स्थिति सुधारने के प्रति केन्द्र सरकार भी संजीदगी नहीं दिखा पाई है. ममगांई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी शहरी मामलों के जानकार अनुभवी नेता को सौंपने का आग्रह करते हुए कहा है, कि एक वर्ष पूर्व 15 दिसम्बर 2017 को नगर निगमों की नाकामियों के चलते सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में तीन सदस्य मॉनिटरिंग कमेटी के तत्वावधान में दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग का काम शुरू हुआ था. 25 अप्रैल 2018 को चालू अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण व ट्रैफिक जाम से मुक्ति आदि के लिए केन्द्र सरकार के आग्रह पर एसटीएफ का भी गठन कर सीलिंग व तोड़-फोड़ को गति देने का प्रयास किया गया .  यह भी पढ़ें : कच्चे लालच में न फंसे, रेडी टू मूव प्रॉपर्टी में ही करें निवेश 15 दिसम्बर 2017 से जारी कार्रवाई में मॉनिटरिंग कमेटी, एसटीएफ व ईपीसीए के नाम पर दिल्ली के नगर निगम अब तक 12,000 से अधिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई कर चुका है, जबकि एलएंडडीओ 7200 प्रदूषित उद्योगों पर कार्रवाई हेतु सर्वेक्षण पूर्ण कर चुका है और जल्द ही कार्रवाई हो लकती है. एलएंडडीओ की रिहायशी 45 कॉलोनियों के 12,500 प्रतिष्ठान, एसटीएफ को प्राप्त 4000 शिकायत एवं डीएसआईआईडीसी के 51837 औद्योगिक उद्योगों की सूची भी कार्रवाई हेतु प्रेषित की जा चुकी है. यमुनापार व बाहरी दिल्ली में दस हजार से अधिक उद्यमी सीलिंग के डर से अपना उद्योग बंद कर चुके हैं.
भाजपा नेता ने कहा कि सीलिंग के नाम पर मॉनिटरिंग कमेटी व नगर निगम के मनमाने दुर्व्यवहार तथा आधुनिक हथियारों से लैस दिल्ली पुलिस व सीआरपीएफ के सिपाहियों द्वारा व्यापारिक प्रतिष्ठानों की घेराबंदी जैसे कदमों से दहशत का माहौल बनाया गया. एकतरफा कार्रवाई कर प्रतिष्ठान सील तो किए गए लेकिन डी-सील के लिए आवेदन के साथ एक लाख रूपए की फीस देना जरूरी किया गया, चाहे मॉनिटरिंग कमेटी व निगम की कार्रवाई ही गलत रही हो, लेकिन धनराशि वापस नहीं किये जाने के मनमाने कदम थोपे गए. ममगांई ने कहा कि केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री ने 2 अप्रैल को मास्टर प्लान 2021 में संशोधनों की घोषणा कर दिल्ली में सीलिंग से 100 प्रतिशत राहत मिलने का अतिउत्साही दावा कर खुद की पीठ थपथपाई, लेकिन सौ आवेदकों को भी राहत नहीं मिली. पिछले 8 महीने से तो शहरी विकास मंत्री खुद चुप्पी साधे हुए हैं.
ममगांई ने कहा कि 15 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अनधिकृत निर्माणों के लिए जिम्मेदार डीडीए, एमसीडी सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकद्दमा दर्ज कर, निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई. सीलिंग का दंश झेल रहे उद्यमियों के धरने, प्रदर्शन व बंद पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि टॉस्क फोर्स भी नाकाम साबित हुई है. दिल्ली में आज भी लगातार धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी हैं.

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