Home Business कैट ने चुनाव से पहले जारी किया व्यापारियों का राष्ट्रीय चार्टर

कैट ने चुनाव से पहले जारी किया व्यापारियों का राष्ट्रीय चार्टर

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 05 अप्रैल. आगामी लोकसभा चुनाव में देश के सात करोड़ व्यापारियों की निर्णायक भूमिका के उद्देश्य से कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने आज पांडुचेरी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यापारियों का राष्ट्रीय चार्टर जारी किया. इस दौरान कैट ने कहा कि जो दल व्यापारियों के चार्टर को लागू करने का भरोसा देगा, उसी दल को देश के सात करोड़ व्यापारी एक वोट बैंक के रूप में एकमुश्त वोट देगा. सम्मेलन में देश के 26 राज्यों के दौ सौ से अधिक प्रमुख व्यापारी नेताओं ने भाग लेते हुए कहा कि अब तक व्यापारियों को सदा उपेक्षित रखा गया, इसके चलते मजबूर होकर देश भर के व्यापारियों को अपने आपको एक वोट बैंक में बदलना पड़ रहा है. क्योंकि देश में अब वोट बैंक की राजनीति हावी है.
praveen khandelwal
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने चार्टर जारी करते हुए कहा कि चार्टर में एक बेहतर ई-कॉमर्स पॉलिसी घोषित हो, जो मौजूदा विषाक्त ई-कॉमर्स व्यापार को साफ कर सके तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार करे. इसके अलावा रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति बनाने, केंद्र में पृथक रूप से एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय के गठन, एक रिटेल रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन, ई-कॉमर्स के लिए एक रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन, जीएसटी कर ढाँचे का सरलीकरण, देश के वर्तमान रिटेल व्यापार के ढाँचे को आधुनिक बनाने, डिजिटल भुगतान पर लगने वाले बैंक शुल्क को समाप्त करने, देश में एक मॉडल किराया कानून बनाने सरीखी मांग शामिल हैं. यह भी पढ़ें : आपराधिक प्रत्याशी के विरोध में निर्दलीय नेता को जिताकर भेजे जनता, ऐसा होने पर राजनैतिक दलों को भी बदलना पड़ेगा रवैय्या चार्टर में यह भी माँग की गई है, कि जीएसटी में पंजीकृत प्रत्येक व्यापारी को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर 10 लाख का दुर्घटना बीमा, कम्प्यूटर खरीद पर व्यापारियों को सब्सिड़ी, बैंकों द्वारा व्यापारियों को दिए जाने वाले कर्ज पर चालू ब्याज दर पर 2 प्रतिशत की रियायत एवं 65 वर्ष की आयु से व्यापारियों को पेन्शन दी जाए.
चार्टर में व्यापारियों को मिलने वाले कर्ज को दोबारा परिभाषित करने, बाजारों में ढाँचागत सुविधाएँ प्रदान करने, व्यापारियों एवं बाजारों की व्यापक सुरक्षा, फूड ग्रेन और आवश्यक वस्तुओं को वायदा बाजार से बाहर रखने, जम्मू में चुंगी समाप्त करने तथा ग्राम पंचायत से लेकर विधान परिषद में अन्य वर्गों की तरह प्रतिनिधित्व करने की मांग भी शामिल है.

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