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ई कॉमर्स में अनियमितताओं पर कैट ने उठाये सवाल, सरकार पर विदेशी कंपनियों को सहारा देने का आरोप

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 05 मार्च. देश में ई कॉमर्स में हो रही अनियमितताएं और उनकी शिकायतें करने के बाद भी सरकार द्वारा अभी तक कोई कदम न उठाये जाने से नाराज व्यापारिक संगठन कैट ने आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को भेजे एक पत्र में सरकार की उदासीनता पर रोष जताते हुए कहा है, कि सरकार स्थानीय व्यापार के स्थान पर विदेशी कंपनियों को ज्यादा तरजीह दे रही है. ताकि वे भारत के रिटेल व्यापार पर ई कॉमर्स एवं एफडीआई के माध्यम से कब्जा कर सकें.
प्रभु को भेजे पत्र में कैट ने ई कॉमर्स कंपनियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कंपनियां सरकार की एफडीआई पॉलिसी का खुला उल्लंघन करते हुए सीधे उपभोक्ताओं को सामान बेच रही हैं, जबकि पॉलिसी के अनुसार यह कंपनियां केवल बिजनेस टू बिजनेस ही व्यापार कर सकती हैं. अपने पोर्टल पर यह कंपनियां भारी मात्रा में डिस्काउंट एवं अन्य स्कीम देकर कीमत को प्रभावित करती हैं, जो पॉलिसी के अनुसार अवैध है. कैट ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि कैट की शिकायतों पर कार्रवाई करना तो दूर इस विषय पर अभी तक एक भी कदम नहीं उठाया गया. देश के रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति की दिशा में एक कदम भी नहीं उठाया गया और सरकार ने एकल ब्रांड में 100 प्रतिशत ब्रांड को मंजूरी देते हुए देश के रिटेल व्यापार की कमर तोड़ने का पूरा इंतजाम कर दिया है.  यह भी पढ़ें : मनगढंत आरोपों पर कुर्सी क्यूं छोड़ें मेयर.? 
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने इन कम्पनियों पर आरोप जड़ते हुए कहा कि सरकार की नीति का उल्लंघन करना इन कंपनियों की आदत बन गयी है और ये काम बेखौफ होकर खुले आम किया जा रहा है. मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन देना सीधे तौर पर उपभोक्ता और उत्पाद की कीमतों को प्रभावित करना है और बाजार पर अपना एकाधिकार स्थापित करना है.

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