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राजनीति में दागियों पर केन्द्र सरकार का हलफनामा दुर्भाग्यपूर्ण

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सांकेतिक चित्र
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा किसी सजायाफ्ता को राजनैतिक पार्टी बनाने से रोकने के लिए दाखिल याचिका का केन्द्र सरकार द्वारा विरोध करना अनैतिक है.
डॉ. रिखबचंद जैन, अध्यक्ष, भारतीय मतदाता संगठन, फाईल फोटो
केन्द्र सरकार और विशेष तौर से भाजपा, राष्ट्रीय सेवक संघ हर समय सत्य और शाश्वत सिद्धांतों की दुहाई देते हंै, लेकिन राजनीति को अपराधमुक्त करने से परहेज करते हंै. परहेज ही नहीं बल्कि राजनीति की अपराधमुक्ति का विरोध भी करते हैं. ये लोग अयोग्य, दागी, हत्यारे, बलात्कारी, गुुंडे और घोटालेबाज लोगों को पार्टी में लेने और टिकट देने से भी परहेज नहीं करते हैं. ऐसे में राजनीति में स्वच्छता कहाँ से आयेगी? जब राजनीति में राष्ट्रनीति की जगह पार्टियां सिर्फ सत्ता युद्ध करेंगी और अपराधियों के कंधों पर सरकार चलेगी तो ऐसा करना मतदाताओं के साथ धोखा नहीं तो और क्या है? अगर आज के राजनीतिज्ञ अपराधमुक्ति के लिए आवश्यक कानून, संविधान और चुनावी कानून में परिवर्तन नहीं करना चाहते हैं, तो मतदाताओं और नागरिकों को चाहिये कि अपनी ताकत दिखाते हुए ऐसी पार्टियों को उखाड़ फेकें. कोई भी मतदाता ऐसे अपराधी लोगों को गले लगाने वाली राजनैतिक पार्टियों को वोट न दे. सभी राजनैतिक पार्टियों से भारतीय मतदाता संगठन निवेदन करता है, कि राष्ट्रहित में वे किसी भी अवांछित, दागी व्यक्ति को टिकट न दें. चाहे राज्यसभा हो या लोकसभा हो. जो पार्टी इन बातों पर अमल न करे, उन पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो. चुनाव आयोग अपराधी प्रत्याशियों के हलफनामें सिर्फ फाईल में न रखे. चुनाव आयोग को संवैधानिक ताकत दी जाये कि ऐसे हलफनामों वाले प्रत्याशियों की उम्मीदवारी रिजेक्ट करे. अगर कोई प्रत्याशी जीतने के बाद दागी साबित होता है, तो उसे तुरन्त निरस्त किया जाये. सदन में उपस्थित न रहने या सदन में बाधा डालने वाले सांसद एवं विधायकों की सदस्यता को निरस्त करने का अधिकार मतदाताओं को दिया जाए. राईट टू रिकॉल लागू हो. यह भी पढ़ें : सीलिंग से त्रस्त व्यापारियों के उनके रहनुमाओं से कुछ प्रश्न  अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनयाचिका के पक्ष में भारतीय मतदाता संगठन और भारत के मतदाता खडेÞ हैं. भारत के मतदाताओं को उम्मीद है, कि सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा. सरकार और राजनैतिक पार्टियों पर लगाम लगेगी. राजनेता वर्ग राजनीति न करे, राष्ट्रनीति पर चले. ऐसी जनभावना का सभी पार्टियां और राजनेता आदर करें.
जब पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद और पार्टी दोनों पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया तो भारत में ऐसा क्यों नहीं? जरा सोचिए!
                                              नई नियुक्ति
भारतीय मतदाता संगठन के तुरन्त प्रभावी निर्णय के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार विपिन गुप्ता को संगठन के संयोजक पद पर नियुक्त किया है. विपिन गुप्ता के अनुभव से भारतीय मतदाता संगठन की गतिविधियाँ और जोर पकडेगीं और भारतीय मतदाताओं को न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है.

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