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राजनैतिक दलों की शुचिता और अपराधमुक्ति ही दिला सकती है सही आजादी- डॉ. रिखबचंद जैन

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Dr. Rikhab Chand jain, File Photo
विशेष.
आजादी को 71 वर्ष हुए. भारत देश बहुत आगे बढ़ा. कृषि, उद्योग, शिक्षा, लोकतन्त्र, पंचायती राज, विज्ञान, स्वास्थ्य सेवाएं, नारी उत्थान समेत अनेक क्षेत्रों में प्रभावी विकास हुआ. साथ-साथ आबादी भी बढ़ती गई. 36 करोड़ से अब 132 करोड़ पहुंच गई. विकास के नये आयाम कायम हुए परन्तु गरीबों की संख्या, आबादी के साथ बढ़ी. प्रतिशत चाहे कुछ कम हुआ हो. गरीबों की परेशानी बढ़ती महंगाई, बढ़ते भ्रष्टाचार और बढ़ती हुई जरुरतों को लेकर घटने का नाम ही नहीं ले रही है. दलित वर्ग के साथ सामाजिक समरसता व्यवहार अनेकानेक कानून और आरक्षण के बावजूद भी अभी तक असामान्य हैं. महिला शक्ति को आगे बढ़ाने के कई प्रयास किए जा रहे हैं. महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायपालिका, खेलकूद, पर्वतारोहण, राजनीति, सेना, सुरक्षा, पुलिस और उद्योग-व्यापार सभी क्षेत्रों में नये-नये मुकाम हासिल किए. इन सबके बावजूद घर-परिवार एवं समाज में खासतौर से गरीब और मध्यम श्रेणी के परिवारों में उनकी दुर्दशा है. तलाक का डर, घरेलू हिंसा, यौन शोषण, सुरक्षा का अभाव और खासतौर से मुस्लिम महिलाओं की हालत तो और भी खराब है.
2014 तक देश में कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने यदा-कदा जब भी अवसर मिला शासन किया. यह कहना ठीक नहीं है, कि उन 67 वर्षों में सिर्फ बदहाली बढ़ी और कुछ नहीं हुआ. अच्छे दिन लाने वाली पार्टी और माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय व्यवस्था को जिस स्तर से शुरू किया, वह 1947 के स्तर से कहीं बहुत ऊँचा था. जिसके चलते भाजपा सरकार को अच्छे दिन लाने, नये सिस्टम बनाने तथा बदलाव लाने के प्रयास में अनेक सहूलियतें मिलीं. इसके बावजूद और अनेक प्रयास करने के बाद भी भाजपा सरकार अभी भी अच्छे दिन लाने के लिए मात्र संकल्पित ही है. तमाम प्रयासों के बावजूद जनता-जनार्दन को अच्छे दिन आने का अभी भी इंतजार है. यह भी पढ़ें : वरिष्ठ जदूय नेता आफाक अहमद खान बने जदयू के राष्ट्रीय महासचिव, युवा जदूय दिल्ली प्रदेश ने किया भव्य स्वागत आजादी के 71वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रत्येक नागरिक प्रशासन और सरकार के साथ अच्छे दिन लाने के लिए कदमताल करे, परिश्रम करे. स्वयं से अधिक अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कुरीतियों तथा बुराईयां से लड़े, ऐसी जनता की सहभागिता ही अच्छे दिन ला सकेगी. नेता, सरकार और राजनीति बिना जनता के सहयोग के कभी भी कुछ नहीं कर सकेगी, यह एक कड़वी सच्चाई है.
साथ ही राजनैतिक पार्टियों को भी देशभक्त बनने का संकल्प लेना चाहिए. कोई भी राजनैतिक पार्टी देशहित में किसी भी अपराधी को पार्टी या सत्ता में आने के लिए टिकट ना दे. टिकट ना बेचें, हॉर्स ट्रेडिंग ना करें. राजनैतिक शुचिता प्रत्येक राजनैतिक पार्टी के अपने हित में भी हैं. जो भी पार्टी ऐसा करेगी, उसकी छवि सुधरेगी. जनता को चाहिए कि जो पार्टी अपराध व अपराधी मुक्त हो, ऐसी स्वच्छ, देशभक्त राजनीति पर चलने वाली पार्टी को ही ‘वोट’ दें. मतदाताओं के पास ‘मतदान’ ही अन्तिम हथियार है, जिसके द्वारा वे अपराधी व्यक्तियों को टिकट देने और आश्रय देने वाली पार्टियों का बहिष्कार कर सकते हैं. मतदाताओं द्वारा ऐसी पार्टियों और ऐसे प्रत्याशियों का बहिष्कार करना ही राजनैतिक शुचिता को बढ़ायेगा. बिना राजनैतिक शुचिता के देश में सुशासन असम्भव है.
चुनाव आयोग से निवेदन करता हूँ कि 2019 के चुनाव और इससे पहले होने वाले चुनाव में धनबल और बाहुबल पर अंकुश लगाए. दागी प्रत्याशियों के नाम के आगे लाल निशान, वोटिंग लिस्ट और चुनाव प्रचार सामग्री में लगाना अनिवार्य करें, ताकि भोले-भाले मतदाता ऐसे दागी लोगों को ‘वोट’ देने से बच सकें. सीमा से अधिक खर्च करने वाले, चुनाव लड़ने वाले नेताओं के खिलाफ चुनाव आयोग कड़ी कार्यवाही करे और 20 वर्षों के लिए उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करे. जीतने वाले नेता से ‘सीट’ खाली करवाए. मतदाताओं को भी चाहिए कि वे जागरुक हों और अपने अमूल्य वोट की कीमत समझें. सही तरीके से सोच-समझकर वोट देने से ही लोकतन्त्र सुरक्षित रह सकता है. वोट किसे दें? किसे ना दें? उसके लिए निम्न बातों पर ध्यान दें. वोट अवश्य दें. बिना वोट दिए कोई न रहे. वोट न बेचें.
वोट के बदले नकद, गिफ्ट, शराब और सामान न लें. जाति, धर्म, लिंग, रंग और क्षेत्र के आधार पर वोट न दें. वोट योग्य व्यक्ति नि:स्वार्थी और सेवाभावी उम्मीदवार को दें. अहिंसा में विश्वास रखने वाले प्रतिनिधि को ही वोट दें. अपराधी को नकारें और उसे वोट न दें. अपराधियों को टिकट देने वाली पार्टी का भी बहिष्कार करें. मतदाता मित्र बनें, औरों को वोट देने के लिए प्रेरित करें. सही वोट देने से ही, सही जनप्रतिनिधि और सही सरकार चुना जाना संभव है. भारतीय मतदाता संगठन प्रत्येक राजनैतिक पार्टी से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वच्छ राजनीति के लिए संकल्प लेने का निवेदन करता है. जिस देश के मतदाता स्वतंत्र एवं सही सोच के साथ मतदान करते हैं, वहाँ लोकतन्त्र का विकास होता है. आजादी सुरक्षित होती है. ऐसा करते रहने से भारत देश आजाद ही नहीं अपने राष्ट्र की प्रगति का विश्व में ड़ंका बजा सकेगा और गरीब, दलित और शोषित जन-जन का सपना पूरा कर सकेगा. आओ सब मिलकर भारत की आजादी अखंड बनायें. हमारे लोकतन्त्र को मजबूत एवं सर्वकल्याणकारी बनाएं. जन-जन की सहभागिता से ही सबका विकास होगा, अकेली सरकार से कभी नहीं.
-डॉ. रिखब चन्द जैन
संगठन प्रमुख, भारतीय मतदाता संगठन

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