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उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए काउंटडाउन शुरू, शांत प्रकाश जाटव दौड़ में सबसे आगे!

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विशेष संवाददाता.
नई दिल्ली.01 मार्च. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के लिए नाम तय करने को लेकर गहमागहमी अब तेज हो गई है. संगठन में राज्यसभा के लिए नाम तय करने के लिए चर्चाओं का दौर तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है. तमाम कयासों के बीच संगठन में कई ऐसे नाम हैं जो राज्यसभा की दौड़ में सबसे आगे हैं. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रभारी तथा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर कई जागरूक आंदोलन चलाने वाले भाजपा नेता शांत प्रकाश जाटव का नाम राज्यसभा की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है. गौरतलब है, कि शांत प्रकाश जाटव जहां सामाजिक समरसता के लिए कई छोटे-बड़े आंदोलन चला रहे हैं, वहीं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने अभूतपूर्व शौर्य के लिए जाने-जाने वाली चमार रेजीमेंट की बहाली के लिए मांग उठाकर उन्होंने जाटव समाज में गहरी पैठ बनाई है. जाटव समाज के गौरव को पुनर्स्थापित करने वाली इस मुहिम के चलते अनुसूचित जाति समाज, खासतौर पर जाटव समाज का बड़ा हिस्सा उनके पीछे लामबंद हो गया है. 2019 का आम चुनाव अब करीब है, ऐसे में उत्तर प्रदेश की साढ़े चार करोड़ अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है. ऐसे में शांत प्रकाश जाटव के नाम को दरकिनार करना पार्टी के लिए भी संभव नहीं होगा, क्योंकि इन साढ़े चार करोड़ अनूसचित समाज की आबादी में दो करोड़ नब्बे लाख से ज्यादा तादाद जाटव समाज की है. गौरतलब है, कि शांत प्रकाश जाटव के अलावा खटीक समाज से भी राज्यसभा के लिए दो और नाम भाजपा के प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री तथा विद्यासागर सोनकर भी कतार में हैं. लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो विजय सोनकर शास्त्री तथा विद्यासागर सोनकर दोनों ही जहां सांसद रह चुके हैं, वहीं खटीक समाज से मौजूदा समय में भी डॉ. उदितराज, डॉ. भोला सिंह, विनोद सोनकर और वीरेंद्र खटीक सहित कई सांसद हैं. लेकिन जाटव समाज को अपनी आबादी के लिहाज से अभी तक उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, इसे लेकर जाटव समाज में भी असंतोष है. और पार्टी इसे बखूबी समझ भी रही है. ऐसे में जबकि अगले ही वर्ष आम चुनाव होने हैं, पार्टी इतनी बड़ी आबादी को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती है. इसके अलावा भी एक और कारण है, जो शांत प्रकाश जाटव की दावेदारी को मजबूत करता है. वह, यह कि बीते कुछ समय में पार्टी को कई दलित आंदोलनों से जूझना पड़ा है, ऐसे में उन्हें आगे करना पार्टी की कारगर रणनीति के तौर पर काम कर सकता है. शांत प्रकाश जाटव जहां दलित समाज एक प्रमुख चेहरा हैं, वहीं वह सामाजिक समरसता हेतु कई सफल मुहिम का नेतृत्व भी कर चुके हैं.  यह भी पढ़ें : ‘सीलिंग के खौफ’ के बीच पटेल नगर मार्किट में होली मिलन कार्यक्रम, अजय माकन से मिले व्यापारी उनके द्वारा चलाई जा रही अखिल भारतीय हिंदू जाटव महासभा के अंतर्गत देश भर में एक हजार से ज्यादा हवन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान में देश भर में लोग जात-पात के भेदभाव को छोड़कर इस मुहिम से जुड़े हैं. वहीं दूसरी ओर चमार रेजीमेंट की बहाली की मांग के साथ शांत प्रकाश जाटव दलित समाज की अस्मिता के गौरव का वाहक बनकर खड़े हुए हैं. गौरतलब है कि शांत प्रकाश जाटव का नाम पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के तौर पर भी उछला था, जिसे लेकर दलित समाज में काफी उत्साह का माहौल बना रहा था. अब जबकि राज्यसभा की सीटों के लिए नाम तय करने का समय नजदीक आ चुका है, ऐसे में दलित समाज में एक बार फिर यह उम्मीद जगी है, कि इस बार उनके नेता को उचित सम्मान मिलेगा और वह सरकार का हिस्सा बनकर संगठन के काम को तेजी से आगे बढ़ाएंगे.

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