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अवैध बिल्डर माफिया को प्रोत्साहित करेगा डीडीए का प्रस्ताव, नहीं रूकेगी सीलिंग, अनियोजित शहर के रूप में बदलेगी दिल्ली

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 07 फरवरी. एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश ममगांई ने डीडीए द्वारा मास्टर प्लान 2021 में प्रस्तावित संशोधनों को अपर्याप्त व अनावश्यक बताते हुए कहा है, कि इससे व्यापारियों को सीलिंग से मुक्ति नहीं मिलेगी, बल्कि यह प्रस्ताव अवैध बिल्डर माफिया को प्रोत्साहित करेगा तथा दिल्ली और ज्यादा अनियोजित शहर के रूप में बदलेगी. उन्होंने प्रस्ताव के संबंध में अपनी आपत्तियां, संशोधन व सुझाव भी डीडीए के समक्ष दर्ज कराए हैं. विदित हो कि प्रस्तावित बदलावों के लिए 6 फरवरी तक आपत्ति व सुझाव हेतु डीडीए ने पब्लिक नोटिस जारी किया था.
jagdish mamgain
इस प्रस्ताव पर ममगांई ने कहा कि लोकल शॉपिंग सेंटर व सामुदायिक केंद्र का एफएआर आवासीय प्लॉट के समकक्ष करने का प्रस्ताव किया गया है, लेकिन ग्राउंड कवरेज, भवन की अधिकतम ऊंचाई व सुप्रीम कोर्ट द्वारा इकाईयों की निर्धारित संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. इसके अलावा अतिरिक्त एफएआर का लाभ संशोधित नक्शा बिल्डिंग बाई-लॉज, ढांचागत सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा आदि से अनापत्ति के उपरान्त ही मिल सकेगा, जिससे सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ेगा और सीलिंग से जल्द राहत भी नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा कि दुकान एवं आवासीय प्लॉटों में एफएआर बढ़ने के बावजूद केवल ग्राउंड प्लोर को ही व्यावसायिक उपयोग की अनुमति है, यानि प्रथम तल व बेसमेंट में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इससे राहत नहीं मिल पाएगी. यह भी पढ़ें : दृष्टि उत्थान ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को दिये बोर्ड परीक्षा के दबाव से निपटने के टिप्स  ममगांई ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अनिवार्य रूप से कन्वर्जन चार्ज जमा कराने की स्थिति जस की तस है, जबकि व्यापारियों की मांग है कि इसे केवल 10 वर्ष तक ही लिया जाए. इस संबध में मास्टर प्लान 2021 में संशोधन कर प्रत्येक वर्ष की अनिवार्यता की जगह अधिकतम 10 वर्ष किया जाना चाहिए. साथ ही पेनाल्टी के रूप में 10 गुणा की जगह केवल 2 गुणा राशि ही लेने का प्रस्ताव न्यायोचित है. ममगांई ने कहा कि मास्टर प्लान के पैरा 16.2 में साफ कहा गया है, कि दिल्ली नगर निगम केन्द्र सरकार की स्वीकृति से तीन वर्ष के अंदर विशेष क्षेत्र भवन अधिनियम अधिसूचित करेगा व तब तक विशेष क्षेत्र के रूप में परिभाषित वॉल्ड सिटी, करोलबाग, अनधिकृत नियमित कॉलोनी व गांव आबादी पर बिल्डिंग बॉय-लॉज के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई में छूट होगी. चूंकि दिल्ली नगर निगम विशेष क्षेत्र भवन अधिनियम अधिसूचित करने में विफल रहा है, लिहाजा मास्टर प्लान के पैरा 16.2(3) में तीन वर्ष तक मिली छूट को अधिनियम अधिसूचित होने तक यथास्थिति बनाये रखने के रूप में संशोधित किया जाना चाहिए.
ममगांई ने कहा कि 12 मीटर रोड पर बने गोदामों को नियमित करने के प्रस्ताव पर ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों की आपत्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लिहाजा इसमें 12 मीटर रोड की शर्त को अनिवार्य न कर वांछनीय किया जा सकता है. वहीं उन्होंने दिल्ली की सभी मार्किटों के कन्वर्जन शुल्क कम किये जाने की भी मांग की, ताकि व्यापारी बिना किसी बोझ के इसका भुगतान कर सकें.

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