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राम मंदिर पर देरी और सवर्णों की नाराजगी पड़ी भाजपा को भारी, पार्टी को कोर इश्यूज पर काम करना होगा- देवेश गुप्ता

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Devesh Gupta
संवाददाता.
नई दिल्ली. 16 दिसंबर. पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी को पटखनी देते हुए हिंदी पट्टी के तीनों राज्यों में अपनी सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया. अब भारतीय जनता पार्टी अपने गढ़ माने जाने वाले छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सहित राजस्थान में हुई हार का कारण ढूंढने में जुटी है. पार्टी जहां हार के कारण ढूंढने की कवायद कर ही रही है, वहीं पार्टी कार्यकर्ता हार के लिए मोदी सरकार के कुछ कदमों को जिम्मेदार बता रहे हैं. हिंदू विचारधारा के समर्थक और प्रसिद्ध व्यवसायी व समाजसेवी देवेश गुप्ता इस हार की वजह एससी-एसटी बिल किए बदलाव, राम मंदिर में देरी को बताते हुए कहते हैं, कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद संसद में एससी एसटी एक्ट बिल को संशोधित करके सवर्णों को नाराज कर दिया, जो पार्टी का कोर वोटर थे. यह भी पढ़ें : हिंदू विरोधी अंबेडकरवाद, नवबौद्ध और संत शिरोमणि रविदास, त्रिशंकु विचारधारा लेकर आगे नहीं बढ़ पायेगा अनुसूचित समाज, कोई एक रास्ता चुनना होगा- शांत प्रकाश जाटव लिहाजा सरकार के फैसले से आहत सवर्ण समाज ने पार्टी को वोट नहीं दिया और नोटा का रूख कर लिया, जिसका नतीजा पार्टी को हार के तौर पर देखना पड़ा है. इसके अलावा राम मंदिर के मसले को अटकाकर रखना भी भाजपा को भारी पड़ा है. गुप्ता ने कहा कि पार्टी के मेनिफेस्टो में राम मंदिर को चुनावी वादा बनाने वाली सरकार इस पर संसद में अध्यादेश लाने से बचती रही, जिसका खामियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ा है. देवेश गुप्ता कहते हैं, कि हार का एक बड़ा कारण खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं, क्योंकि पूरे चुनावी प्रचार में उन्होंने अपनी नीतियों और कार्यों का सकारात्मक प्रचार न कर सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोला, जिसके चलते राहुल गांधी को अपेक्षित प्रचार मिला और वह चुनाव का केंद्र बिंदु बन गए. हालांकि इस हार में सकारात्मकता देखने वाले समाजसेवी देवेश गुप्ता के मुताबिक बीजेपी बेशक सरकार बनाने में कामयाब ना रही हो, लेकिन मध्यप्रदेश में पार्टी को कांग्रेस से ज्यादा मत प्रतिशत हासिल हुआ, वहीं राजस्थान में जहां चुनावी विशेषज्ञ पार्टी के 20 से 30 सीटों पर सिमटने का अनुमान लगाए बैठे थे, वहां भी पार्टी ने 70 से अधिक सीटें हासिल की हैं. देवेश गुप्ता ने कहा कि इन चुनावी नतीजों ने बीजेपी को एक बड़ा सबक सिखाया है, कि यदि सरकार कोर इश्यूज पर काम नहीं करेगी तथा राम मंदिर के प्रति ढुलमुल रवैया ही अपनाकर रखेगी, तो पार्टी के लिए 2019 के चुनाव में भी डगर मुश्किल हो सकती है.

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