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जीएसटी ढांचे की समीक्षा की मांग, अधूरा जीएसटी व्यापारियों के लिए मुसीबत बना

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 26 अप्रैल. लगभग नौ महीने के समय में ही जीएसटी कई टुकड़ों में बंटा हुआ दिखाई देने लगा है, जिसे लेकर व्यापारी परेशान हैं. इस अपूर्णता के चलते जीएसटी का वास्तविक स्वरुप छिन्न-भिन्न हो गया है. देश में जीएसटी लागू होने के लगभग नौ महीने के समय के दौरान न केवल जीएसटी की दरों बल्कि जीएसटी के नियम एवं उनके क्रियान्वयन की पूर्ण समीक्षा किया जाना बेहद आवश्यक है. व्यापारिक संगठन कैट ने जीएसटी की कमजोरियों, लीकेज और और लूपहोल्स को बंद किये जाने की मांग करते हुए जीएसटी को एक बेहतर कर व्यवस्था बनाने के लिए 28 प्रतिशत सहित सभी कर दरों का दोबारा तार्किक वर्गीकरण किये जाने की मांग की है. कैट ने कहा है, कि जीएसटी में व्याप्त विसंगतियों को दूर करते हुए जीएसटी के दो प्रमुख सिद्धांतों टैक्स का दायरा विकसित करने और स्वयं कर पालना को प्रोत्साहित किया जाए. यह भी पढ़ें : फैल रहा ई-रिक्शा चार्जिंग का अवैध कारोबार, शिकायत पर कार्रवाई से बीएसईएस का इंकार कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया की अध्यक्षता में गठित कैट के एक आंतरिक पैनल ने जीएसटी के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए सिफारिश की है, कि अब समय आ गया है जब सरकार को जीएसटी की पूर्ण समीक्षा करते हुए इसे स्थायी कर प्रणाली के रूप में विकसित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने चाहिएं. संगठन ने कहा है, कि व्यापारियों के साथ सरकार का कोई सीधा संवाद न होने से स्थिति ज्यादा विकट हो गयी है. ऐसे में केंद्र एवं राज्य स्तर पर व्यापारियों के साथ एक स्थायी फोरम गठित हो, जहाँ लगातार संवाद जारी रहे. कैट ने कहा कि जीएसटी पोर्टल का सुचारू रूप से काम न करना, कई अन्य कानूनों का जीएसटी के साथ तालमेल न होना तथा जीएसटी की प्रक्रियाओं की बारे में जानकारी का अभाव आदि से जीएसटी के प्रति सकारात्मक वातावरण विकृत हो रहा है, जिसको ठीक करने की लिए जरूरी कदम उठाये जाने तुरंत जरूरी हैं.

 

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