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प्राकृतिक चिकित्सा के नियमन के लिए अलग बोर्ड की मांग, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े साधकों की समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिए बैठक आयोजित

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 04 जनवरी. बीते दिनों भारतीय प्राकृतिक चिकित्सक संघ, दिल्ली की एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के लगभग 25 संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं प्राकृतिक चिकित्सा छात्रों के प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक चिकित्सकों एवं चिकित्सालयों में राजकीय मान्यता की दशा और दिशा पर विचार मंथन किया. डॉ. श्याम नारायण पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा के आयोजन का औचित्य बताते हुए डॉ. प्रबोध राज चन्दोल ने कहा कि आज देश में बिना औषधि के अभ्यास में लगे अनेक प्राकृतिक चिकित्सा के साधकों को अपने कार्य में कुछ कठिनाईयों का सामना करना पड रहा है. उन्हीं के समाधान के लिए यह बैठक बुलाई गई है.
प्राकृतिक चिकित्सा में गांधीजी के योगदान पर चर्चा करते हुए डॉ. पाण्डेय ने अनेक भारतीय प्राकृतिक चिकित्सकों के जीवन और उनके कार्यों का जिक्र किया. डॉ. पाण्डेय ने बताया कि शुरू में अनेक लोगों ने इस विधा का विरोध किया, हालांकि धीरे-धीरे समाज में इसको स्वीकार किया जाने लगा. तथा इसके लिए किसी भी प्रकार के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं थी, यह बात स्वयं सरकार ने भी स्वीकार की थी. लेकिन बदलते समय के साथ इस विधा के अपनाने वालों को भी कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि इस बैठक का औचित्य ऐसे में और भी बढ़ जाता है, जबकि सरकार ने इस वर्ष से प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाने की घोषणा भी कर दी है. यह भी पढ़ें : चार साल से बस उम्मीदों पर सवार जनता, नए साल में कितनी राहत, कोई नहीं जानता..? इस अवसर पर डॉ. अरविन्द त्यागी ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के लिए भारत सरकार ने केंद्रीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग अनुसन्धान परिषद् नामक संस्था बनाई थी. डॉ. त्यागी ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सकों एवं योगाचार्यों को प्रैक्टिस करने के लिए किसी प्रकार के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन अभी कुछ दिन पहले सरकार ने योग के नियमन के लिए एक बोर्ड का गठन किया, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा के साधकों के लिए किसी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम प्राकृतिक चिकित्सा के साधकों के विरुद्ध है. यदि किसी बोर्ड का गठन करना ही था, तो योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा दोनों के लिए किया जाना चाहिए था. उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा के नियमन के लिए भी अलग बोर्ड की मांग की, जिसका सभा में उपस्थित सभी लोगों ने समर्थन किया. इस अवसर पर बैठक में प्राकृतिक चिकित्सकों के अधिकारों के लिए कई प्रस्ताव पारित किये गए, जिनमें केंद्र सरकार द्वारा योग प्रमाणन बोर्ड की तरह ही प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड का गठन, सभी डिप्लोमाधारियों एवं गुरु शिष्य परम्परा द्वारा प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को केंद्र व राज्यों के स्तर पर सूचीबद्ध किये जाने, प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार, संरक्षण-संवर्धन एवं अनुसन्धान हेतु केंद्र एवं राज्य स्तर पर सरकारों द्वारा बजट में अलग से प्रावधान किया जाने की मांग की गई. इसके अलावा प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में विभिन्न राज्यों में जिला चिकित्साधिकारी व अन्य सरकारी महकमों का हस्तक्षेप समाप्त किए जाने की मांग भी की गई.

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