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कोचिंग इंस्टीट्यूट और विशेष क्षेत्रों में सीलिंग न करने की मांग

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 20 जनवरी. दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश ममगांई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति से राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट को शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक सीलिंग से मुक्त रखने की मांग की है. ममगांई ने कहा कि ऐसे कोचिंग इंस्टीट्यूट को सील करना साल भर से वार्षिक परीक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग ले रहे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना होगा.
jagdish mamgain
उन्होंने कहा कि विशेष क्षेत्र के रूप में परिभाषित वॉल्ड सिटी, करोलबाग, अनधिकृत नियमित कॉलोनी व गांव आबादी पर मास्टर प्लान-2021 के दिशा-निर्देश व वर्तमान भवन अधिनियम के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है. ममगांई ने कहा कि मास्टर प्लान-2021 में स्पष्ट है, कि इन क्षेत्रों के लिए मास्टर प्लान-2021 के अनुमोदन के तीन साल के अंदर दिल्ली नगर निगम केन्द्र सरकार की स्वीकृति से विशेष क्षेत्र भवन अधिनियम बनाएगा, लेकिन डीडीए, एमसीडी व केन्द्र सरकार बीते 11 साल में इसमें विफल साबित हुए हैं. लिहाजा जब तक इन क्षेत्रों के लिए विशेष क्षेत्र भवन अधिनियम बनकर अधिसूचित नहीं होता, तब तक वॉल्ड सिटी, करोलबाग, अनधिकृत नियमित कॉलोनियों व गांव आबादी के रिहायशी क्षेत्रों में चल रही व्यवसायिक गतिविधियां यथावत चलती रहें. उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 से पूर्व रिहायशी क्षेत्रों में चल रही व्यवसायिक इकाइयों को भी सील नहीं किये जाने की बात करते हुए कहा कि लाला लाजपत राय मार्किट, सब्जी मंडी, कुतुब रोड, रिफ्यूजी कॉलोनी राजेन्द्र नगर में सीलिंग नहीं की जानी चाहिए थी. यह भी पढ़ें : विधायकों के सस्पेंशन के बाद बैकफुट पर ‘आप’, अब सीलिंग के खिलाफ करेगी आंदोलन  ममगांई ने कहा कि वर्ष 2007 में जब 2534 सडकें अधिसूचित हुई थीं, तब कन्वर्जन शुल्क काफी कम व व्यवहारिक था. अधिकतम ए श्रेणी के लिए 6174 रूपए प्रति वर्ग मीटर था, लेकिन 10 जुलाई 2012 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 6174 रूपए प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर इसे 1500 गुना 89,000 रूपए प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया. अन्य श्रेणियों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, जिसका भुगतान करना व्यापारियों के लिए काफी मुश्किल हो गया. बीते महीने केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने ए श्रेणी की तीन मार्किटों को अस्थायी छूट देते हुए 89,000 रूपए से घटाकर 22274 रूपए प्रति वर्ग मीटर कर दिया, लेकिन यह छूट केवल 30 जून 2018 तक भुगतान करने वालों को ही मिलेगी. हास्यास्पद स्थिति यह है, कि जो व्यवसायी पूर्ववर्ती 89,000 रूपये की दर से राशि जमा करा चुके हैं, उनको इसका लाभ नहीं मिलेगा. यानि ईमानदारी से कन्वर्जन शुल्क अदा करने वालों को राहत नहीं और जो डिफॉल्टर हैं, उन्हें लाभ दिया जा रहा है. केवल तीन मार्किट के ही नहीं दिल्ली की सभी मार्किटों के कन्वर्जन शुल्क कम होने चाहिएं. जो व्यवहारिक हों व व्यापारी बिना किसी बोझ के भुगतान किए जा सकें. इसी के साथ फ्लोर एरिया अनुपात भी 180 से बढ़ाकर 240 करने से तीनों तलों पर चल रहे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को समान लाभ मिलेगा, क्योंकि अधिकतर जगह प्रत्येक तल का स्वामित्व अलग व्यक्तियों के पास हैं.

 

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