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गोलमेज सम्मेलन में प्रेस नोट 3 को लागू करने तथा रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 09 अगस्त. ई- कॉमर्स व्यापार पर नीति को लेकर देश के विभिन्न प्रमुख संगठनों ने कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स के बैनर तले दिल्ली में एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें ई-कॉमर्स के लिए एक सुदृढ़ नीति बनाने, व्यापार के समान अवसर दिए जाने, डेटा की सुरक्षा और छोटे व्यापारियों को ई-कॉमर्स से जोड़ने की मांग की गई.
गोलमेज सम्मेलन में व्यापार, उद्योग, ट्रांसपोर्ट, किसान, लघु उद्योग, उपभोक्ता संगठनों के अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों, आर्थिक विश्लेषकों, चिंतकों आदि ने भाग लिया. सम्मेलन में पारित एक सर्वसम्मत प्रस्ताव में सरकार से मांग की गई कि वर्ष 2016 के प्रेस नोट तीन को सख्ती से लागू किया जाए. तथा ई-कॉमर्स की देख-रेख और नियंत्रित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए.
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 तक देश में डिजिटल इकॉनमी एक ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी तथा वर्ष 2030 तक यह कुल अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा 50 प्रतिशत बन जाएगी, ऐसे में ई-कॉमर्स के लिए एक ठोस, समग्र एवं मजबूत नीति का होना बेहद जरूरी है, जिसमें घरेलू व्यापार के हित सुरक्षित हों, आधुनिक टेक्नोलॉजी का समावेश हो तथा डेटा सुरक्षा का मजबूत तंत्र हो. यह भी पढ़ें : चिरंजीलाल धानुका स्मृति समाजसेवा अवार्ड डॉ. जवाहर सूरी शेट्टी को, सेवा को भार नहीं, आभार मानें- डॉ. शेट्टी सरकार द्वारा ई-कॉमर्स के लिए नीति दस्तावेज जारी करने का स्वागत करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सीमित इन्वेंटरी की अनुमति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि ई-कॉमर्स कंपनियां केवल टेक्नोलॉजी प्रदाता हैं और उनका इन्वेंटरी से कोई लेना देना नहीं है. यदि ऐसा हुआ तो ई-कॉमर्स का बुनियादी ढांचा ही हिल जायेगा. उन्होंने कहा कि बल्क परचेज बहुत ही भ्रामक शब्द है, जिसको सही तरीके से परिभाषित करना जरूरी है.
सम्मेलन में बोलते हुए अनेक वक्ताओं ने कहा कि ई-कॉमर्स की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है, वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स बाजार का कोई अधिकृत आकंड़े न होने से इस व्यापार में विसंगतियों और मनमानी का बोलबाला है. उन्होंने कहा कि डेटा का बहुत ही महत्व है, लेकिन अभी तक डेटा को लेकर बेहद उदासीनता है, जबकि दूसरी तरफ डिजिटल वित्तीय ढांचे को भी नए सिरे से बनाने की जरूरत है.
अनेक वक्ताओं ने कहा कि रूपे कार्ड आॅनलाइन रूप में पूरी तरह एक विफल सिस्टम है. इसकी जगह सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जारी किया गया भारत क्यू आर को ई-कॉमर्स में डिजिटल भुगतान के लिए अपनाते हुए प्रोत्साहित करना चाहिए.

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