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अवैध निर्माणों की शरणस्थली बनता धीरपुर वार्ड, मानक विहीन मकानों के अवैध निर्माण कार्य का खेल जारी

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 23 मार्च. दिल्ली नगर निगम अवैध निर्माण के खिलाफ चाहे कितनी भी सख्ती बरतने का दावा करता हो, लेकिन भ्रष्टाचारी निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और बिल्डरों की सांठ-गांठ पर अंकुश लगा पाने में निगम पूरी तरह विफल साबित हो रहा है. इसके चलते राजधानी में अवैध निर्माण का धंधा खूब फल-फूल रहा है. सिविल लाईन जोन के अंतर्गत जूनियर इंजीनियर वार्डों में अवैध निर्माण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई ना करके इनसे अवैध कमाई में जुटे हैं.  यह भी पढ़ें : धीरपुर वार्ड में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी, सर्विस रोड पर ही बना डालीं कई दुकानें जोन के अंतर्गत आने वाले धीरपुर वार्ड में कहीं लोक निर्माण विभाग की सर्विस रोड पर भवनों का निर्माण कार्य जारी है, तो कहीं तमाम नियम-कायदों को ताक पर रखकर बेसमेंट, पार्किंग, दुकानें तथा रिहायशी फ्लोर बनाकर विभागीय अधिकारी काली कमाई करने में जुटे हैं. जबकि इस तरह के भवनों के निर्माण के खिलाफ कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है, कि राजधानी दिल्ली में इस तरह के अवैध निर्माण को बढ़ावा देना पूरी तरह से गैरकानूनी है. लेकिन इस सबके बावजूद धीरपुर वार्ड के जेईई और बिल्डर्स का यह गोरखधंधा खूब फल-फूल रहा है. इलाके में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय निवासियों ने बातचीत के दौरान बताया कि क्षेत्र में निगम अधिकारियों का भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है, कि बिना बिल्डर के भवन का निर्माण कराना लगभग असंभव हो चला है. लोगों का आरोप है, कि धीरपुर वार्ड में निगम के भ्रष्ट जेईई के चलते यह पूरा वार्ड अवैध निर्माणों की शरणस्थली बन चुका है. गौरतलब है, कि बीते कुछ महीने पहले दिल्ली नगर निगम ने अवैध निर्माण को लेकर एक बहुत बड़ी मुहिम चलाई थी. और इस मुहिम में सैकड़ों संपत्तियों को सील भी किया गया था. लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान लागू हुई आचार संहिता की आड़ में निगम के अधिकारी भ्रष्टाचार के बूते अवैध निर्माण का नया इतिहास रचने में लगे हैं.

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