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एसपीएम कॉलेज में छात्राओं ने की सामयिक मुद्दों पर चर्चा, सबरीमला में प्रवेश और सोशल मीडिया के इंपेक्ट और इफेक्ट पर छात्राओं ने रखे अपने विचार

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 10 जनवरी. राजधानी के पंजाबी बाग स्थित एसपीएम कॉलेज में सामयिक मुद्दों पर विमर्श की कड़ी में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. तीन कैटेगिरी में आयोजित इस वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रो. चंद्रकांता माथुर तथा डॉ.ज्योति लाकड़ा ने जज की भूमिका निभाई. सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश, सोशल मीडिया का इंपैक्ट और इफेक्ट तथा तथा भारतीय समाज में रेपिस्ट के लिए सजा का निर्धारण विषयों पर आयोजित इस चर्चा में कॉलेज की छात्राओं ने अपने विचार रखे. इस दौरान सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश का संविधान पुरुषों तथा महिलाओं को समान अधिकार देता है, ऐसे में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को वर्जित करना तथा उसका विरोध करना संविधान का अपमान है. यह भी पढ़ें : पीतमपुरा ब्लड बैंक द्वारा विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन पर रक्तदान शिविर का आयोजन  मौजूदा दौर में युवाओं पर सोशल मीडिया के इंपैक्ट और उसके इफेक्ट पर अपने विचार व्यक्त करते हुए छात्रा शालू ने कहा कि सोशल मीडिया आधुनिक युग में संचार का सर्वग्राही माध्यम बन गया है, लेकिन युवाओं को इसकी अत्यधिक इस्तेमाल से बचना होगा और इसके उपयोग और दुरूपयोग के बीच की सीमा रेखा को समझना होगा. वही फाइनल की छात्रा रहनुमा ने भारतीय समाज में रेपिस्ट को दी जाने वाली सजा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश भर में महिलाओं के साथ बढ़ते छेड़छाड़ और बलात्कारों के मामलों के चलते यह जरूरी है, कि बलात्कारियों के लिए ऐसी सख्त सजा का निर्धारण किया जाए जिससे अपराधियों के बीच कानून का खौफ पैदा हो और अपराधी इससे सबक ले सकें.

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