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आज पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक, अमावस्या पर प्रसन्न होंगे पितृ और देवता

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सांकेतिक चित्र
धर्म विशेष.
आज 13 जुलाई को अमावस्या है. अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं. और अच्छी आत्माएं घर में जन्म लेती हैं.

* अमावस्या के दिन घर के कोने-कोने को अच्छी तरह से साफ करें. सभी प्रकार का कबाड़ निकालकर बेच दें।
* इस दिन सुबह-शाम घर के मंदिर और तुलसी पर दिया अवश्य ही जलाएं, इससे घर से कलह और दरिद्रता दूर रहती है.
* अमावस्या को गाय को पांच फल भी नियमपूर्वक खिलाने चाहिएं, इससे भी घर में शुभता एवं हर्ष का वातावरण बना रहता है.
* अमावस्या की तिथि को कोई भी नया कार्य, यात्रा, क्रय-विक्रय तथा समस्त शुभ कर्मों को निषेध कहा गया है. इसलिए इस दिन इन कार्यों को नहीं करना चाहिए.
* अमावस्या के दिन किसी दूसरे का अन्न खाने से एक महीने के साधन-भजन का पुण्य खिलाने वाले व्यक्ति को मिल जाता है. इसलिए अमावस्या के दिन मुफ्त का अन्न न खाएं.
* अमावस्या के दिन क्रोध, हिंसा, अनैतिक कार्य, माँस-मदिरा का सेवन एवं स्त्री से शारीरिक संबंध, मैथुन कार्य आदि का निषेध बताया गया है, जीवन में स्थाई सफलता हेतु इस दिन इन सभी कार्यों से दूर रहना चाहिए. यह भी पढ़ें : भगवान शंकर के निवास तिब्बत का विषय हमारे लिए भावनात्मक – पंकज गोयल 
* अमावस्या के दिन एक ब्राह्मण को भोजन अवश्य ही कराएं, इससे आपके पितृ सदैव प्रसन्न रहेंगे. आपके कार्यों में अड़चने नहीं आएँगी, घर में धन की कोई कमी नहीं रहेगी और आपका घर-परिवार टोने-टोटकों के अशुभ प्रभाव से भी बचा रहेगा.
* अमावास्या तिथि में वनस्पतियों में सोम का वास होने से उस दिन बैलों को हल में जोतने का पूर्णत: निषेध ‘स्मृतियों’ में किया गया है. उस दिन बैलों को पूरे दिन चरने के लिये छोड़ देना चाहिये, जिससे चारे के द्वारा अमृत कला का पान कर वे अपने शरीर को पुष्ट कर कृषि के कार्य में अधिक सहयोग कर सकें.
* अकाल मृत्यु घर में न हो, जल्दी-जल्दी किसी की मृत्यु न हो उसके लिए घर में अमावस्या के दिन गीता का सातवां अध्याय पढ़ना चाहिये. पाठ पूरा हो जाये तो सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिये कि हमारे घर में सबकी लंबी आयु हो और जो पहले गुजर गये हैं, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और आज के गीता पाठ का पुण्य उनको पहुँचे.
* अमावस्या पर पितरों का तर्पण अवश्य ही करना चाहिए. पितरों के निमित्त अमावस्या तिथि में श्राद्ध व दान का विशेष महत्व बताया गया है. इस तिथि में पितरों के उद्देश्य से किया गया दानादि अक्षय फलदायक होता है. शास्त्रों के अनुसार पितृगण अमावस्या के दिन वायु रूप में सूर्यास्त तक घर के द्वार पर उपस्थित रहते हैं और अपने स्वजनों से श्राद्ध की अभिलाषा करते हैं. अत: इस दिन हर व्यक्ति को यथाशक्ति उनके नाम से दान करना चाहिए. पितरों को खीर बहुत पसंद होती है इसलिए प्रत्येक माह की अमावस्या को खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन के साथ खिलाने पर महान पुण्य की प्राप्ति होती है, जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती हैं. पितृ पूजा करने से मनुष्य आयु, पुत्र, यश कीर्ति, पुष्टि, बल, सुख व धन धान्य प्राप्त करते हैं.
* धर्मशास्त्रों में कहा गया है, कि अमावस्या को व्रत करना चाहिये, अर्थात निराहार रहकर उपवास करना चाहिये. उप-समीप, वास-निवास अर्थात परमात्मा के समीप रहना चाहिये. अमावस्या के दिन ऐसे ही कार्य करने चाहिएं, जो परमात्मा के पास में ही बिठाने वाले हों. सांसरिक खेती-बाड़ी, व्यापार आदि कर्म तो परमात्मा से दूर हटाने वाले हैं. संध्या हवन, सत्संग, परमात्मा का स्मरण ध्यान कर्म परमात्मा के पास बैठाते हैं, इसलिए माह में एक दिन उपवास अवश्य ही करना चाहिये और वह दिन अमावस्या का ही श्रेष्ठ मान्य है, क्योंकि सूर्य और चन्द्रमा ये दोनों शक्तिशाली ग्रह अमावस्या के दिन एक ही राशि में आ जाते हैं. चन्द्रमा ही सभी औषधियों को रस देने वाला है. जब चन्द्रमा ही पूर्ण प्रकाशक नहीं होगा तो औषधि भी निस्तेज हो जायेंगी. ऐसा निस्तेज अन्न, बल, वीर्य, बुद्धिवर्धक नहीं हो सकता, किन्तु बल, वीर्य, बुद्धि आदि को मलिन करने वाला ही होगा. इसलिये अमावस्या का व्रत करना चाहिये. उस दिन अन्न खाना वर्जित किया गया है और व्रत का विधान किया गया है.

 

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