Home Uncategorized चार साल से बस उम्मीदों पर सवार जनता, नए साल में कितनी...

चार साल से बस उम्मीदों पर सवार जनता, नए साल में कितनी राहत, कोई नहीं जानता..?

214
0
SHARE
सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी, जाता वर्ष ना जाने कितने सवाल छोड़ जाता है. और ना जाने कितने विषय ऐसे रह जाते हैं, जिनके ऊपर ना तो कोई सुनवाई होती है और ना ही उस पर किसी तरह का गहन अध्ययन किया जाता है. वर्तमान सरकार जब सत्ता में आई थी तो ना जाने कितने लोक-लुभावन वादे जनता के साथ किए थे. अब जबकि सरकार के जाने का समय भी आ गया, परंतु चर्चा एवं विषय सब वहीं के वहीं खड़े हैं. उल्टा हालात बद् से बद्तर हो गए हैं. सीलिंग, नोटबंदी का इतना बुरा प्रभाव जनता पर पड़ा है, जिसे शब्दों में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है. कृपया विस्तार से बताएं कि हालात किस प्रकार से सुधारे जा सकते हैं? क्या यूँ ही जनता परेशानियों में घिरी रहेगी? -प्रतीक चावला
Girish Sharma, property conslutant
उत्तर- प्रतीक जी, सबसे पहले तो नववर्ष 2019 की आपको एवं मेरे सभी पाठकों को ढेर सारी शुभकामनाएं. आप सभी के प्रोत्साहन से आज मुझे अपना खुद का परिचय देने की आवश्यकता नहीं है. आप सभी, जो कि मेरे लेखों के नियमित पाठक हैं एवं मेरे चैनल Property Tips By Girish Sharma के सब्सक्राइबर हैं, उनके कारण मुझे कार्य को और अधिक विस्तार एवं उत्साह से करने का हौंसला मिला है. एक बार फिर से तहेदिल से आप सभी पाठक वर्ग का शुक्रिया. नए साल में मैं कोशिश करूंगा कि जो मुद्दे सभी की परेशानी का सबब बनते हैं, उनको सरलता से किस प्रकार सुलझाया जा सकता है. ताकि उन पर अपनी वीडियोज बनाऊं एवं लेख लिखूं. यह भी पढ़ें : सीलिंग पर केजरीवाल की पहल के बाद गेंद केंद्र के पाले में, केंद्र का एक कदम ला सकता है लाखों जिंदगियों में उजाला प्रतीक जी, राजनीतिक पार्टियां तो अपने निजी स्वार्थ को सर्वोपरि मानती हैं. जनता का हित सिर्फ और सिर्फ चुनावी वादों में रह जाता है. वर्तमान सरकार जब सत्ता में आई तो ना जाने कितनी लोक-लुभावन स्कीम्स की बात कही गई, जिससे कि आम जनता को फायदा हो. परंतु हुआ क्या, वही ढाक के तीन पात. जनता तो और भी अधिक त्राहि-त्राहि करने को मजबूर हो गई. सीलिंग, नोटबंदी और जीएसटी ने सब पर ऐसा घेरा डाला कि लोग उससे बाहर ही नहीं आ पा रहे हैं. चले-चलाए काम ठप्प हो गए. जितनी भी पूंजी एकत्रित की गई थी सभी पर जोरदार प्रहार हुआ. और रही-सही कसर सीलिंग ने पूरी कर दी. जनता तो सिर्फ यही कहने को मजबूर हो गई है कि ‘क्या हुआ तेरा वादा’. सरकार ने अभी तो सबका बंटाधार कर दिया है. एक आम नागरिक सोच नहीं पा रहा है, कि जो उत्साह सरकार के बनने पर था, क्या वह दिखावा था? बीते 4 वर्षों ने तो तकलीफें ही दी हैं. हालात सुधरेंगे की और बद्तर होंगे समझ से परे है. अभी तो सिर्फ वक्त के साथ ही धारा में बहने का समय है. मैं इस सारे परिपे्रक्ष्य को इस नजरिए से देखता हूँ कि एक राजा अपनी प्रजा से कहता है, कि आप लोग सिर्फ एक महीना भूखे रहने का कष्ट करें. फिर एक माह के बाद मैं आपको देसी घी से चुपड़े हुए परांठे खिलाऊंगा. लेकिन उसी प्रजा में से कुछ समझदार व्यक्तियों का यह कहना था, कि देसी घी के परांठे तो हम तब खा सकेंगे, जब हम तीस दिन तक लगातार भूखे रहकर जिंदा बचेंगे. मैंने इस संक्षिप्त कथा में पूरा वर्णन कर दिया है.

Shanti property wishes you a very Happy New Year 2019.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here