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व्यापारियों के लिए फीकी दीवाली, बाजार से उपभोक्ता गायब,   40 फीसदी कम बिक्री का अनुमान

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संवाददाता.
नई दिल्ली. 18 अक्तूबर. धनतेरस बीतने के बाद आज छोटी दीपावली का त्यौहार देश में मनाया जा रहा है. ऐसे समय जबकि खरीददारी हर वर्ष जोरों-शोरों से होती थी, इस बार देश भर के बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है. और दीवाली का त्यौहारी माहौल बना ही नहीं है. बाजारों में ग्राहकों की आवक बेहद कम है, जिसके चलते बीते वर्ष के मुकाबले बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट है. सबसे बड़ा झटका इस अनुमान को लगा है, कि त्यौहार के चलते तो ग्राहक बाजार का रूख करेगा ही, लेकिन त्यौहार की पीक वक्त होने के बावजूद भी मार्किट में ग्राहक नहीं है और व्यापारियों को बड़ा नुकसान होने का अंदेशा सच साबित होने की ओर है.
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, कि उपभोक्ता नकदी की तंगी झेल रहे हैं, इसके चलते बाजारों में मंदी का माहौल है. उपभोक्ता अधिकांश बेहद जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं और दीवाली त्यौहार की खरीद से बच रहे हैं. ई-कॉमर्स कम्पनियों द्वारा सरकार की नीतियों की धज्जियाँ उड़ाते हुए बड़ी मात्रा में डिस्काउंट देकर सामान बेचने का भी विपरीत प्रभाव बाजारों के व्यापार पर पड़ा है. ऊपर से जीएसटी से उपजे भ्रम ने बाजारों में अफरा-तफरी फैला रखी है और व्यापारी परेशान हैं. त्यौहार से जुड़े अधिकांश सामान पर कर की दर 28 प्रतिशत होने के कारण उपभोक्ता इतना ज्यादा कर दर देना नहीं चाहता. बाजारों के माहौल को देखते हुए लगता ही नहीं कि देश के इतने बड़े त्यौहार का मौसम चल रहा है. यह भी पढ़ें : त्यौहारों से पहले बाजारों में रौनक गायब, बीते साल के मुकाबले इस साल 30 फीसदी घटी बिक्री  कन्स्यूमर डयूरेबल, एफएमसीजी प्रॉडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, किचन का सामान, लगेज, घड़ियाँ, गिफ़्ट आइटम, मिठाइयाँ, ड्राई फ्रÞूट, होम डेकोर, बिजली फिटिंग, रेडीमेड गारमेंट, फर्नीचर, डेकोरेशन आइटम आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो मंदी की सीधी मार झेल रहे हैं.
गौरतलब है, कि भारत में त्यौहारी सीजन पहले नवरात्र से शुरू होकर 14 दिसम्बर तक चलता है और फिर दोबारा 14 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल तक चलता है. और इस बीच दिसम्बर में क्रिसमस और नववर्ष का सीजन भी आता है.

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