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फिर छले गए चालीस लाख दिल्लीवासी, अनधिकृत कॉलोनियों पर अपने वायदे से मुकरी सरकार- जगदीश ममगांई

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 11 मार्च. एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगांई ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा दिल्ली में स्वामित्व या हस्तांतरण, मार्टगेज अधिकारों को प्रदान करने के लिए अपनाई जाने वाली
jagdish mamgain. Bjp Leader
प्रक्रिया की सिफारिश के लिए एक समिति के गठन के प्रस्ताव को दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख से अधिक लोगों के साथ एक भद्दा मजाक बताया है. दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की बजाय उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली 10 सदस्य समिति का गठन को चुनावी प्रपंच बताते हुए ममगांई ने कहा कि 26 साल से बार-बार अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के सरकारी प्रस्ताव आते रहे हैं, जिनका मकसद सिर्फ दिल्लीवासियों को वोट के लिए छलना होता है.  यह भी पढ़ें : कैट द्वारा ड्राफ्ट ई-कॉमर्स पॉलिसी पर चर्चा के लिए विचार-विमर्श सत्र आयोजित ममगांई ने कहा कि हर बार चुनावी बेला में भारत सरकार अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का मुद्दा उठाती है. इससे पहले 29 दिसम्बर 2014 में भी आगामी वर्ष में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को नजर में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कैबिनेट ने दिल्ली में 895 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की घोषणा की थी. केंद्रीय मंत्रीमंडल ने मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन कर 31 मार्च, 2002 से कट-आफ डेट बढ़ाकर 1 जून, 2014 तक बनी सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय लिया. तब कहा गया कि यह 31 मार्च 2002 और 1 जून 2014 के बीच अस्तित्व में आई 700-800 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले अतिरिक्त 7 लाख लोगों को भी नियमितीकरण से होने वाले लाभों को प्रदान करेगा. उस समय तत्कालीन शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा था, कि वर्ष 2012 में लिया गया कॉलोनियों को नियमित करने के निर्णय की केवल अधिसूचना जारी हुई थी और वह कैबिनेट की मंजूरी के बिना था. इस बार नियमितीकरण को संसद की मंजूरी मिली है और हमने कैबिनेट की भी मंजूरी ले लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मोदी सरकार भी अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को भूल गई और उनके सातों सांसदों ने भी इसे भुला दिया. अब जबकि लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और वर्ष 2014 लोकसभा व वर्ष 2015 विधानसभा चुनाव में वादा भी किया था, लिहाजा एक कमेटी बनाने की नौटंकी की गई है.

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