Home Uncategorized रियल एस्टेट में जीएसटी पर अभी नहीं है आम सहमति, नोटबंदी और...

रियल एस्टेट में जीएसटी पर अभी नहीं है आम सहमति, नोटबंदी और जीएसटी के बाद रियल हो गया रियल एस्टेट

328
0
SHARE
प्रश्न- गिरीश जी, यह रियल एस्टेट में जीएसटी कब से लागू हो रहा है? पहले से ही व्यापार-धंधे ठप्प पड़े हैं. प्रॉपर्टी की सेल-परचेज आधे से भी आधी हो गई है. ऊपर से यह जीएसटी लगने से तो दाल-रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे. फाइनेंसर तो नोटबंदी के बाद से ही रियल एस्टेट मार्किट से हटने लगा था और अब जीएसटी लगने से तो पूरा का पूरा रियल एस्टेट बिजनेस ठप्प पड़ जाएगा. मैं यह इसलिए कह रहा हूँ कि मैं भी रोहिणी में रियल एस्टेट कंसल्टेंट हूँ और नोटबंदी के बाद बहुत बुरे दौर से गुजर रहा हूँ. कृपया बताएं कि इसे छोड़कर और कौन सा दूसरा धंधा शुरू करें. अब तो हिम्मत भी जवाब दे गई है.
– राम अवतार बंसल, रोहिणी, दिल्ली
उत्तर. भाई साहब मैं आपका दर्द समझ सकता हूँ. असल में मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ कि पिछले कई वर्षों से रियल एस्टेट रियल नहीं था. प्रॉपर्टी के दामों में हर जगह अनाप-शनाप उछाल आ रहा था. जो कि ठीक नहीं था. जहां तक दिल्ली के रोहिणी इलाके का सवाल है, तो रोहिणी के अधिकतर कम आबादी वाले सेक्टर्स में प्रॉपर्टी की सेल-परचेज में सट्टा चलता था, जो कि फाइनेंसर्स के हाथ खींच लेने के कारण बहुत कम हो गया है. जबकि भरपूर आबादी वाले सभी सेक्टर्स में प्रॉपर्टी की सेल-परचेज आज भी जारी है. हाँ प्रॉपर्टी की सेल-परचेज में कमी जरूर आई है. मैं आपको रियल एस्टेट के बारे में बता दूं कि रियल एस्टेट असल में ट्रेडिंग बिजनेस था ही नहीं. यह केवल लैंड खरीदकर बिल्डिंग्स बनाना और उन बिल्डिंग्स को प्रॉपर्टी डीलर्स के माध्यम से कमीशन पर बेचने का काम था, ना कि प्रॉपर्टी में ट्रेडिंग का. लेकिन बड़े-बड़े मेट्रो शहरों में इसने पिछले कई वर्षों से बिजनेस का रूप ले लिया और अब हर दूसरा व्यक्ति फाइनेंसर बन गया, जिन्हें अब दिक्कत आ रही है. फर्जीवाडे से बचने के लिए कर लें फेस्टिवल आॅफर की पूरी जांच  क्योंकि खर्च सबके बढ़ गए हैं और आमदनी कम हो गई. जबकि असली खरीददार आज भी मार्किट में पहले जितना ही है और केवल कमीशन पर काम करने वाले लोग आज भी काम करके पैसा कमा रहे हैं. हाँ यह जरूर है, कि अनाप-शनाप पैसा नहीं कमा पा रहे. अब बात आती है दिल्ली में प्रॉपर्टी पर जीएसटी लगाने की, तो मैं आपको बता दूं कि दिल्ली सरकार के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली दोनों ही चाहते हैं, कि प्रॉपर्टी में प्लॉट और भवनों की सेल-परचेज को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए. जो कि अब तक नहीं है. दिक्कत सिर्फ यह आ रही है, कि प्रॉपर्टी की सेल-परचेज पर जीएसटी लगाने पर क्या स्टांप ड्यूटी, जो कि पहले से ही 6% और साथ में 1% सर्विस टैक्स लिया जाता था, यानी कि 5 से 7% जो पूरे मूल्य पर टैक्स लिया जाता था, वह भी लिया जाएगा या नहीं. क्योंकि वह सारा टैक्स राज्य सरकार को जाता है. यदि जीएसटी लगता है तो जीएसटी तो बना ही है, कि देश में केवल एक ही तरह का टैक्स हो, तो फिर राज्य सरकार कहां जाएगी? जबकि दिल्ली सरकार प्रॉपर्टी टैक्स 4 प्रतिशत से 6 प्रतिशत को छोड़ने को तैयार नहीं है.
आप बिल्कुल भी चिंता ना करें. रियल एस्टेट बड़े मेट्रो शहरों में खासतौर पर दिल्ली में जितने निचले स्तर तक आना था, आ चुका है. अब भविष्य में प्रॉपर्टी तेजी के संकेत तो बिल्कुल नहीं हैं. हाँ जब तक संसार चलता रहेगा, तब तक रोटी, कपड़ा और मकान बिकने का काम भी चलता रहेगा. मेहनत पहले से ज्यादा करनी पड़ेगी और खर्च सीमित रखने पड़ेंगे, तभी आपकी जीत है. अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज  https://www.facebook.com/girishsharma.shantiproperties/ पर जाकर उनके पिछले लिखे लेख पढ़ सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here