Home Arts & Culture कितनी कारगर भारतीय शिक्षा प्रणाली..?

कितनी कारगर भारतीय शिक्षा प्रणाली..?

213
0
SHARE
सांकेतिक चित्र
भारत की शिक्षा व्यवस्था पर विचार करने से पहले हमें भारतीय शिक्षा का इतिहास और जीवन में शिक्षा के महत्व को समझना आवश्यक है. किसी ने सच ही कहा है कि शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि शिक्षा ही जीवन है. क्योंकि शिक्षा एक व्यक्ति को अपनी क्षमता का पता लगाने में मदद करती है. इसका उपयोग करने से इंकार करना किसी भी व्यक्ति को एक पूर्ण इंसान बनने में बाधा उत्पन्न कर सकता है. परिवार, समुदाय और राज्य को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए मानव समाज में हर स्तर पर शिक्षा का बेहद महत्व है. जीवन में सब-कुछ लोगों के ज्ञान और कौशल पर आधारित है. व्यक्ति, समाज, समुदाय और देश का उज्जवल भविष्य, शिक्षा प्रणाली द्वारा अनुकरण की जाने वाली रणनीति पर निर्भर करता है.
भारतीय शिक्षा प्रणाली को समझने के लिए देश के इतिहास को जानना आवश्यक है. 1975 तक भारत में गुरुकुल की प्रथा चलती आ रही थी. परंतु मैकाले द्वारा अंग्रेजी शिक्षा के संक्रमण के कारण भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का अंत हुआ और उसके स्थान पर कान्वेंट और पब्लिक स्कूल खोले गए. जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलकर रख दिया. इसे एक उदाहरण के जरिए बेहतर समझा जा सकता है. जैसे वर्तमान में देश में जारी शिक्षा प्रणाली में देखने को मिलता है, कि बच्चों को एक पाठ याद करके उससे संबंधित प्रश्नों का उत्तर देना होता है. मतलब गौर किया जाए तो उसमें 3 घंटे में एक साल की याददाश्त की परीक्षा होती है. वहीं दूसरी तरफ विदेशों की शिक्षा प्रणाली इसके विपरीत है. जहां विद्यार्थियों को एक प्रश्न दिया जाता है और उसका सबसे अच्छा जवाब उन्हें ढूंढना होता है. इससे उनका ज्ञान बढ़ता है. इंटरनेट, लाइब्रेरी या किसी भी माध्यम से सवाल का जवाब ढूंढने की आजादी भी होती है. क्या भारत में ऐसी शिक्षा प्रणाली नहीं अपनाई जा सकती है? और अगर नहीं तो क्या देश का भविष्य क्लर्क बनने की तैयारी कर रहा है?
बात सरकारी स्कूलों की हो या प्राइवेट कॉलेज की, हर जगह शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है.  यह भी पढ़ें : आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने का हौंसला दिखाए सरकार  मौजूदा शिक्षा प्रणाली में सरकार द्वारा कई प्रयास करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो पाया है. मौजूदा मोदी सरकार ने शिक्षा प्रणाली में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों को लाने के लिए प्रशिक्षक पोर्टल की शुरूआत की है.
इस टीचर एजुकेशन पोर्टल के जरिए देश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रदर्शन की आॅनलाइन निगरानी की जा सकती है, ताकि उन्हें और बेहतर बनाया जा सके.
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने नई दिल्ली में इस पोर्टल की शुरूआत की थी. उन्होंने कहा था कि देश में शिक्षण की गुणवत्ता सभी के लिए चिंता का विषय है और प्रशिक्षक पोर्टल इसे सुधारने की दिशा में पहला प्रयास है.
उन्होंने कहा था कि देश के लगभग हर जिले में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान हैं. उनके लिए एक गुणवत्ता वाली बेंच मार्किंग की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध होगी.
लेकिन अफसोस ऐसे लाभ सिर्फ कागजों पर गिनवाने के लिए होते हैं. या वोट बैंक के इरादे से इन्हें लाया जाता है. काश सरकारें वास्तव में ऐसे जनता के हित में काम करतीं.
अगर देखा जाये तो मौजूदा शिक्षा प्रणाली में कुछ बुनियादी कमियां हैं, जिनमें शासन की गुणवत्ता में कमी, महंगी उच्च शिक्षा, शिक्षा के अधिकार अधिनियम का जमीनी स्तर पर लागू ना किया जाना इत्यादि मुख्य तौर पर शामिल हैं. जब तक शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं होगी, समावेशी शिक्षा प्रणाली पर जोर नहीं दिया जायेगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं होंगे, तब तक इच्छित नतीजे हासिल नहीं होंगे. -प्रिया सिंह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here