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एनजीटी के आदेश को धता बताते हुए वार्ड नंबर 64 में धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी, शिकायतों पर कान नहीं देते अवैध उगाही में लिप्त अधिकारी

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 06 फरवरी. पॉल्यूशन को लेकर एनजीटी का आदेश हो या फिर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाकर व्यवस्था सुचारू बनाये रखने का काम, निगम के अधिकारी इन सबसे ध्यान हटाकर अवैध उगाही में लिप्त हैं. यूँ तो निगम की भ्रष्टाचार के मामले में चादर इतनी काली हो चुकी है, कि उस पर अब दाग लगने की कोई गुंजाईश भी नहीं बची है. लेकिन वार्ड नंबर 64 में हाईकोर्ट और एनजीटी के सख्त आदेश के बावजूद धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की बाढ़ को रोकने के लिए अधिकारी कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं.  यह भी पढ़ें : पंजाबी बाग में बायोमिथेनेशन, कम्पोस्टर और ट्रीटमेंट प्लांट की शुरूआत, उपराज्यपाल अनिल बैजल ने किया उद्घाटन राजधानी दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण और अवैध निर्माण के खिलाफ कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त आदेश के बावजूद निगम के अधिकारी और कर्मचारी अवैध निर्माणों को खुलकर शह देते हुए खुलेआम हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं. एक तरफ तो राजधानी में सीलिंग को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के केशवपुरम जोन के अंतर्गत आने वाले वार्डों में अवैध निर्माण को बढ़ावा देकर जेई और बिल्डर आपसी मिलीभगत कर खुलेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं. केशवपुरम जोन के अंतर्गत आने वाले वार्डों में खासकर वार्ड नंबर 64 में होटल, दुकान तथा रिहायशी इलाकों में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ अधिकारी किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं. इन इलाकों में 500 गज के ऊपर या उससे अधिक एरिया में होने वाले भवन निर्माण में घोर अनियमितता का हाल यह है, कि भवन निर्माण के दौरान कई बार बिना नक्शे की स्वीकृति या उनमें कई तरह की खामियां होने के बावजूद भी अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं.

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