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दिल्ली में पानी संकट के बीच जल बोर्ड को आठ सौ करोड़ का घाटा, विपक्ष के निशाने पर केजरीवाल

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Arvind Kejriwal, File Photo
प्रवीण श्रीवास्तव.
नई दिल्ली. 06 जून. राजधानी दिल्ली में पानी के संकट के बीच जल बोर्ड के घाटे की खबर भी सामने आ गई है. दिल्ली जल बोर्ड को बीते दो सालों में आठ सौ करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. घाटे की यह खबर उन खबरों के बीच आई है, जिनमें दिल्ली सरकार जल बोर्ड के 178 करोड रुपए के मुनाफे की बात करके अपनी पीठ थपथपा रही थी. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016-17 में 533 करोड़ रुपए और वर्ष 2017-18 में 275 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. राजधानी में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद ढाई साल तक जल बोर्ड का विभाग कपिल मिश्रा के पास था, लेकिन उनकी बर्खास्तगी के बाद सितंबर 2017 से मुख्यमंत्री केजरीवाल खुद जल विभाग की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. गौरतलब है, कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ही दो साल पहले जल बोर्ड के 178 करोड़ रुपए मुनाफे में होने की बात कही थी, यह भी पढ़ें : राजधानी में पानी के संकट पर जनता के द्वार तक जायेगी कांग्रेस लेकिन 2 साल के अंदर स्थिति इतनी बदल गई कि मुनाफे का जश्न मना रही सरकार आठ सौ करोड़ के घाटे की खबर दे रही है. फिलहाल सरकार की तरफ से सफाई देने के लिए सामने आये जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने कहा कि सातवें वेतन आयोग के कारण जल बोर्ड का खर्चा अधिक बढ़ गया है. यह दूसरे साल में आधा हो गया और इसे शून्य किया जाएगा. लेकिन मामले को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है. हालांकि विपक्ष और आरटीआई कार्यकर्ता संजीव जैन सरकार की इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कहना है, कि जलबोर्ड वेतन देने को घाटे की वजह बता रहा है जो एक बड़े घोटाले को दबाने का षड्यंत्र है. इस मुद्दे पर पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि उनकी अध्यक्षता में जो जल बोर्ड 178 करोड़ रुपए के फायदे में था, वह अब केजरीवाल की अध्यक्षता में 800 करोड़ रुपए के घाटे में पहुंच गया है. बहरहाल दिल्ली में पहले ही जल संकट को लेकर विपक्ष के हमलों से जूझ रही दिल्ली सरकार की परेशानी इस आठ सौ करोड़ के घाटे की खबर ने और बढ़ा दी है.

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