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प्राईवेट ही नहीं, सरकारी प्रोजेक्ट भी आएंगे ‘रेरा’ के अंडर, जान लीजिए ‘रेरा’ से जुड़ी ये खास बातें

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न : गिरीश जी, मैं आपके लेखों का नियमित पाठक हूँ. आजकल की परिस्थितियां पुरानी परिस्थितियों से बिल्कुल भिन्न हो गई हैं. रियल एस्टेट सेक्टर वैसे ही इतना विस्तृत है और नित नए प्रावधान आम आदमी को स्टेबल होने ही नहीं दे रहे हैं.
फाइल फोटो
समझ नहीं आता क्या किया जाए? वर्तमान में ‘रेरा’ से संबंधित कई प्रश्न मन में उठ रहे हैं. कृपया आप स्टेप बाई स्टेप इन तथ्यों को स्पष्ट करेंगे तो हम सभी के लिए अच्छा होगा. क्योंकि आपकी सरल भाषा एक आम आदमी के लिए बहुत ही मददगार साबित होती है. – विवेक नारंग, प्रधान रियल एस्टेट एसोसिएशन, मयूर विहार.
उत्तर. विवेक जी, सबसे पहले तो शुक्रिया कि आप मेरे लेखों के नियमित पाठक हैं. आपके लिखे एक-एक शब्द से में शत-प्रतिशत सहमत हूँ. ‘रेरा’ एक ऐसा कानून है, जिसने खरीददारों के मन में एक संरक्षण की भावना को जागृत किया है. इस टर्म का पूरा अर्थ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी है. यह भी पढ़ें : रियल एस्टेट में जीएसटी पर अभी नहीं है आम सहमति, नोटबंदी और जीएसटी के बाद रियल हो गया रियल एस्टेट  सात-आठ साल पहले जब खरीददारों ने अपना पैसा कुछ नामी-गिरामी बिल्डर के प्रोजेक्ट्स में लगाया था, तब उसने यह कभी नहीं सोचा होगा कि जब उसकी पोजेशन मिलने की तारीख आएगी तो बिल्डर उनसे और रुपयों की डिमांड करने लगेगा. बिल्डर उस समय खरीददार को उसके द्वारा सिग्नेचर किया हुआ फॉर्म दिखाता है, जिसमें कि उसने बारीकी से लिखे हुए क्लॉज में सभी कुछ पहले से लिखा होता है. जो कि खरीददार साइन करने से पहले पूरी तरह से नहीं पढ़ता और पोजेशन के समय ऐसी स्थिति आने पर खुद को ठगा सा महसूस करता है. बिल्डर अपने प्रोजेक्ट के लॉन्च ब्रोशर में न जाने कितने मन-लुभावन वायदे करता है. कितने सब्जबाग एक आम आदमी को दिखाता है. परंतु जब वह इंसान बिल्डर द्वारा ठगा जाता है, तब उसकी स्थिति बड़ी दयनीय हो जाती है. समझ नहीं आता कि वह अपनी गुहार कहां लगाए? इन्हीं सब चीजों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ‘रेरा’ बनाया है. जिसमें बिल्डरों को अपनी मनमानी करने से रोका जा सकेगा. और दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान भी होगा. बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी देनी होगी. मैं आपको इससे संबंधित पूर्ण जानकारी अपने आगामी लेखों में देता रहूंगा. सबसे पहले आप इससे संबंधित मुख्य बातें जान लें. बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है, रजिस्ट्रेशन ना होने पर एवं धोखाधड़ी का मामला पाए जाने पर सजा का भी प्रावधान है. इस दायरे में केवल प्राइवेट बिल्डर ही नहीं बल्कि सरकारी प्रोजेक्ट भी आएंगे. प्रोजेक्ट अगर तय समय सीमा पर पूरे नहीं होंगे तो उन पर एक्शन लिया जाएगा. बिल्डर जो भी प्रोजेक्ट पूरा कर उसे खरीददारों को हैंडओवर करेगा, यदि उस स्ट्रक्चर में 5 वर्षों के दौरान कोई खराबी आती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी. बिल्डर से संबंधित पूर्ण जानकारी आॅनलाइन उपलब्ध होगी. अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.) पर जाकर उनके पुराने लिखे लेख पढ़ सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

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