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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आईपीएस, आईआरएस और आईएएस के तर्ज पर एआईजेएस की पैरवी की, कहा आॅल इंडिया एग्जाम से मिलेंगे प्रतिभावान जज

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संवाददाता. 
नई दिल्ली. 31 अक्तूबर.  देश को ज्यूडिशियरी में भी आॅल इंडिया एग्जाम की जरूरत है, जिससे प्रतिभावान छात्र-छात्राएं न्यायायिक क्षेत्र में अपनी सेवा दे सकें. यही वजह है, कि आॅल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज आज की आवश्यकता बन गयी है. ये बातें फोरम फॉर आॅल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहीं.उन्होंने कहा कि जब देश में आईपीएस, आईआरएस और आईएएस हो सकता है, तो एआईजेएस क्यों नहीं हो सकता है? ऐसा करने से एडिशनल जजों की नियुक्तियां होंगी. इसमें सफल हुए अभ्यर्थियों का भविष्य में एक पूल तैयार हो सकेगा, जिससे हायर ज्यूडिशियरी के जजों की नियुक्तियां करना आसान हो जाएगा. इन सबके लिए कानून मंत्रालय सभी सुझावों के लिए तैयार है. सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के साथ मिल-जुलकर काम करने को तैयार है. फोरम फॉर आॅल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज के प्रयासों से फिर एक बार देश में लंबे समय से लंबित पड़े अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की परीक्षा की मांग ने जोर पकड़ लिया है.  हालांकि रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल इस मामले पर जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना आसान बात नहीं है और इसकी राह में अभी कई तरह के रोड़े हैं. कानून मंत्री ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और सरकार, इन सभी की सहमति के बिना इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता.कानून मंत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि निजी तौर पर वे इस मामले का समर्थन करते हैं, यह भी पढ़ें : आर्य सम्मेलन के समापन पर बोले राजनाथ, भारतीय संस्कृति एवं एकजुटता ही भारत की ताकत ताकि न्याय प्रक्रिया में और ज्यादा पारदर्शिता आ सके, साथ ही समाज के हर वर्ग का व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सके और इसका हिस्सा बन सके. उन्होंने 5000 सब ज्यूडिशियरी के पदों को भरने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की सराहना करते हुए कहा कि यदि ज्यूडिशियरी को प्रभावी और तत्काल उत्तरदायी बनाना है, तो हमें रिक्रूटमेंट सिस्टम को पारदर्शी और बेहतर बनाने की सख्त जरूरत है ताकि न्याय व्यवस्था को गति मिल सके. वहीं पूर्व मानव संसाधन राज्य मंत्री संजय पासवान ने लोगों की भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि हाशिये पर पड़े वर्गों को ज्यूडिशियरी में भागीदारी मिलनी चाहिए चाहे वो अनुसूचित जाति-जनजाति से हों या फिर महिला  और  दिव्यांग हों, सभी की इस क्षेत्र में भी हिस्सेदारी होनी चाहिए. इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया, पूर्व न्यायाधीश शोभा दीक्षित, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष  विकास सिंह, फोरम के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव समेत कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया। 

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