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जानें कुंडली पर राहु-केतु का असर

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सांकेतिक चित्र
राहु एक रहस्यमयी और समझ से परे छाया ग्रह है. जो राहु को समझ लेता है, वह इसके फल को भी समझ लेता है. केतु भी एक पाप छाया ग्रह है जो राहु का ही मूल हिस्सा है, जो लगभग राहु के समान ही सातवें भाव में फल देता है.
कुंडली का सातवां भाव शादी, शादीशुदा जिन्दगी और साझेदारी व्यापार, दैनिक व्यवसाय का होता है. यहाँ राहु सातवें भाव में किस ग्रह की राशि में है, उस ग्रह की कुंडली में क्या स्थिति है, के अनुसार प्रभाव देता है. सामान्य रूप से सातवें भाव में राहु-केतु या कोई भी पाप ग्रह शुभ नहीं होता. यहाँ बात राहु के सातवें भाव होने की कर रहे हैं. राहु वायु तत्व राशि मिथुन, तुला और कुम्भ में सबसे ज्यादा शुभ फल देता है. यदि इन तीन राशियों में राहु सातवें भाव में अकेला बैठता है और गुरु, शुक्र, बुध से देखा जाता है, तब वैवाहिक जीवन के लिए शुभ परिणाम देता है. हालांकि शादी होने में थोड़ी देर हो सकती है. लेकिन सप्तमेश बली है तो राहु जल्द ही शादी करवा देता है. राहु सातवें भाव में किस ग्रह की राशि में है और उस ग्रह की कुंडली में क्या स्थिति है, राहु उसके प्रभाव के अनुसार भी फल देगा. बिना सप्तमेश की स्थिति के राहु पूर्ण फल नहीं देगा, चाहे यह स्थिति कुंडली में किसी भी भाव में राहु की यह स्थिति हो.
कब शुभ नहीं होता राहु
आचार्य नवराज पंत
अब राहु सातवें भाव में होने पर शुभ कब नहीं होता, इसकी बात करते हैं. राहु एक पाप ग्रह है. जब यह सातवें भाव में किसी पाप क्रूर ग्रह या सप्तमेश के साथ बैठ जाता है, तब सातवें भाव संबंधी अशुभ फल देगा. जैसे राहु के साथ सातवें भाव में शनि, मंगल बैठ जाने से यह वैवाहिक जीवन और व्यापार के संबंध में कोई शुभ फल न देकर उल्टा वैवाहिक जीवन को खराब कर देगा.
सातवें भाव के राहु को शनि या मंगल का युति या दृष्टि सम्बन्ध का साथ मिल गया है. मतलब राहु सातवें भाव में शनि मंगल के साथ हो या शनि मंगल लग्न में हो, तब यह वैवाहिक जीवन को कष्टकारी बनाकर तलाक करवा देगा. राहु के साथ सातवें भाव में मंगल शनि की स्थिति होने पर यदि शुभ ग्रह बली गुरु, शुक्र, शुभ बुध की दृष्टि सातवें भाव पर होने से तलाक तो नहीं होगा, लेकिन वैवाहिक जीवन सुखद भी नहीं होगा. और वैवाहिक जीवन कष्ट से ही बीतेगा. क्योंकि शुभ ग्रहों की दृष्टि तलाक होने नहीं देगी और राहु के साथ शनि या मंगल या मंगल शनि शादी को ठीक चलने नहीं देंगे. राहु के साथ पाप ग्रहों का साथ सातवें भाव पर साझेदारी या दैनिक व्यापार में नुकसान देकर बंद करा देगा.
राहु के साथ शनि होने से यह जीवनसाथी के साथ बहुत सारे वैचारिक मतभेद की स्थिति पैदा करके जीवनसाथी से अलग करा देगा. और मंगल के साथ राहु सातवें भाव में होने से लड़ाई झगड़ों के द्वारा जीवनसाथी से अलग कर देगा. यदि सातवें भाव में शनि और राहु होते हैं, तब जीवनसाथी का स्वभाव बहुत ही अजीब और समझ से परे होगा. व्यक्ति का जीवनसाथी अपने स्वभाव और व्यवहार से एक पल में कुछ तो दूसरे पल कुछ और होगा.
यदि राहु सातवें भाव में कोई अशुभ योग बनाता है जैसे सूर्य ग्रहण योग, चन्द्र ग्रहण योग, मंगल के साथ अंगारक योग, गुरु चांडाल योग, शुक्र के साथ स्त्री, ऋण दोष आदि. यदि इनमें से कोई दो योग भी राहु के साथ सातवें भाव में हैं, तब भी यह वैवाहिक जीवन और सुख का नाश करेगा.
राहु सातवें भाव में सिर्फ अकेला बैठने पर ही शुभ होता है. इसमें भी यह अपनी नीच राशि धनु में न हो और शुभ ग्रहों से द्रष्ट हो. यदि शुभ ग्रह से भी न देखा जा रहा हो तो सातवें भाव का स्वामी बली होकर केंद्र त्रिकोण में शुभ ग्रह से द्रष्ट या युक्त होने से यह वैवाहिक जीवन के लिए शुभ परिणाम देगा. पर हाँ, जीवनसाथी से अपनी दशा-अन्तर्दशा में वैचारिक मतभेद रखता है, या पति-पत्नी एक-दूसरे के विचारों और बात को कम मानते हैं. या कुछ देर से मानते हैं. राहु सातवें भाव में शुभ है तो वैवाहिक जीवन के लिए शुभ रहेगा और अशुभ योग में है तब वैवाहिक जीवन को बिगाड़ देगा. सातवें भाव में राहु हो तब सप्तमेश कभी भी राहु या केतु के साथ नहीं होना चाहिए. वरना यह स्थिति वैवाहिक जीवन को खराब करती है. क्योंकि ऐसी स्थिति में सातवां भाव भावेश दोनों राहु-केतु की पकड़ में आ जायेंगे, जो ठीक नहीं. यदि सप्तमेश राहु-केतु की पकड़ में नहीं है और न किसी पाप ग्रह की पकड़ में है, तब स्थिति सामान्य रहती है.
केतु भी सातवें भाव में यदि अशुभ योग, अशुभ स्थिति में है, राहु की तरह किसी पाप ग्रह के साथ है तो वैवाहिक जीवन के सम्बन्ध में अशुभ होगा. यदि सातवें भाव में राहु की तरह यह शुभ ग्रहों से देखा जा रहा है, बली है. अपनी उच्च राशि धनु में है या अग्नि तत्व राशियों मेष, सिंह, धनु में है तो शुभ फल देगा. यह सातवें भाव में होने पर राहु की तरह ही फल देता है, लेकिन राहु की तरह जीवनसाथी का स्वभाव नहीं देता. स्वभाव से जीवनसाथी गंभीर होगा, अध्यात्म की ओर जीवनसाथी का रुझान रह सकता है. बाकी स्थिति में यह भी राहु की तरह सातवें भाव में होने पर फल देगा.

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