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कूड़ा प्रबन्धन विफलता की जिम्मेदारी लें उपराज्यपाल, प्रभावी योजना तथा आधुनिक तकनीक की दरकार

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 12 जुलाई. सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली में लैंडफिल साइट व कूडेÞ के प्रबन्धन पर नाराजगी जताने को दिल्ली की प्रशासनिक विफलता एवं प्राधिकरण की बहुलता को जिम्मेदार बताते हुए एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के चेयरमैन रहे अर्बन एक्सपर्ट जगदीश ममगांई ने कहा है, कि अदालत ने दिल्ली में भूजल स्तर में लगातार हो रही कमी पर भी जन-युद्ध की स्थिति का अंदेशा जताया है जो निश्चित ही चिंतनीय है. चूंकि दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल नगर
jagdish mamgain. Bjp Leader
निगम व दिल्ली सरकार के प्रशासक तथा डीडीए के अध्यक्ष हैं, लिहाजा उन्हें लैंडफिल साइट व कूड़े के प्रबन्धन में विफलता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. यह भी पढ़ें : पटेल नगर में ‘पेड लगाओ-जीवन बचाओ’ अभियान के तहत पौधारोपण उन्होंने कहा कि दिल्ली में लैंडफिल साइट के नाम पर केवल डंपिग ग्राउंड हैं, जिसमें लगातार कूड़ा तो डाला जाता रहा है, पर उसके निपटान का कोई प्रबंध नहीं है. इन लैंडफिल साइट पर कूड़ा अधिकतम 20 मीटर की उंचाई तक ही डाला जा सकता है, जबकि वर्तमान में ओखला साइट, गाजीपुर साइट व भलस्वा साइट पर डले कूडेÞ की ऊंचाई 60 से 65 मीटर तक पहुंच चुकी है, जो न केवल पर्यावरण बल्कि जानमाल के लिए भी हानिकारक हो सकती है. हाल ही में गाजीपुर साइट पर कूडेÞ के पहाड के टुकड़े गिरने से 3 लोगों की मौत व कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे.
ममगांई ने कहा कि दिल्ली में कूड़ा निपटान के लिए प्रभावी कार्ययोजना का अभाव है, जिस कारण सभी साईट कूडेÞ के पहाड़ के रूप में परिवर्तित हो गई हैं. यदि शुरू से ही कूडेÞ का नियमित निपटान निगमों द्वारा किया गया होता तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती. सुप्रीम कोर्ट ने तीनों ढलावों से कूडे के तुरंत निस्तारण का आदेश दिया है, पर निगम के पास इतनी बड़ी मात्रा के कूडेÞ के निस्तारण का कोई प्रबंध ही नहीं है. 6 माह में भी इसका निदान नामुमकिन है. इस कूड़े के निस्तारण से पूर्व नए लैंडफिल साइट को स्थापित कर, उन पर कूड़ा डालना प्रारंभ करना होगा, साथ ही पहाड़ बन चुके तीनों ढलाव पर दो-दो कंपोस्ट प्लांट लगाने होंगे. ऐसे में निगमों को कूडेÞ के निपटान के लिए पर्यावरण-मित्र आधुनिक तकनीक अपनानी चाहिए.

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