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अनंत चतुर्दशी पर महालक्ष्मी पूजन 23 को, श्री प्राचीन शक्ति पीठ देवी मंदिर शनिधाम बहादुरगढ़ में होगा आयोजित

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Acharya Navraj Pant, File Photo
धर्म-कर्म विशेष.
आगामी 23 सितंबर को प्राचीन शक्ति पीठ देवी मंदिर शनिधाम में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर महालक्ष्मीजी का तीसरा दिव्य श्रीमहालक्ष्मी यज्ञ आयोजित होने जा रहा है. इस पावन यज्ञ में महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए प्रात: काल से सांय तक पूजन-अर्चन विविध स्नान और प्रसाद वितरण निरंतर चलेगा. इस दिव्य यज्ञ के बारे में जानकारी देते हुए श्री प्राचीन शक्ति पीठ देवी मंदिर शनिधाम बहादुरगढ़ हरियाणा के आचार्य पंडित नवराज पन्त ने मन्दिर में आए हुए भक्तों को महालक्ष्मीजी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करने की जो शक्ति प्रदान करती हैं, उस महाशक्ति का नाम ही श्री महालक्ष्मी है. यह अद्भूत शक्ति प्रत्येक जीव में लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरणास्रोत होती है. इन्हीं की अखंड कृपा के कारण हम सब असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी प्राप्त कर सकते हैं. यह भी पढ़ें : इस बार इसलिए खास है शनिश्चरी अमावस्या का पर्व  यह शक्ति असंख्य रूप में अनगिनत कार्यों में समाहित होती है. कोई इस दिव्य शक्तिरूपा महालक्ष्मीजी को आदि लक्ष्मी के रूप में जानता है, कोई विष्णु पत्नी के रूप में तो कोई गृहलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, भोग लक्ष्मी, ऐश्वर्य आदि-आदि नामों से जानते हैं. यह अनेक दिव्य शक्ति पुंज हमारे जीवन में उन्नति और लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक रहते हैं. भगवती श्री महालक्ष्मीजी की उपासना से ही समस्त कार्य सिद्धि होती है. जीवन का प्रत्येक क्षण किसी ना किसी कार्य की सिद्धि के लिए संलग्न रहता है. प्रकृति में रह रहे सभी चराचर प्राणी भी प्रत्येक क्षण परिवर्तनशीलता के साथ अपने अपने लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए प्रयत्नशील होते हैं. जहां एक भ्रमर पुष्प रस को एकत्रित करता है, वही सिंह अपने शिकार के लिए प्रयास करता है. चराचर जलचर, थलचर, गगनचर, वृक्ष, लता, नदी आदि भी किसी ना किसी कार्य के लिए निरंतर प्रयत्न करते हैं. वह प्रयास क्षणिक और दीर्घकालीन योजनाओं से युक्त होते हैं. जो कार्य क्षणिक और दीर्घ अवधि के लिए किया जाता है, उस कार्य को करने की शक्ति जो प्रदान करती हैं, उस एक मात्र शक्ति का नाम भगवती श्री महालक्ष्मीजी है. यही तेज पुंज शक्ति ही सभी को लक्ष्य प्राप्ति कराती है. इसलिए उनका नाम महालक्ष्मी है.

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