Home State News मॉनिटरिंग कमेटी की तानाशाही के चलते सीलिंग को लेकर सड़क पर...

मॉनिटरिंग कमेटी की तानाशाही के चलते सीलिंग को लेकर सड़क पर उतरे राजौरी गार्डन के मार्बल कारोबारी

110
0
SHARE
संवाददाता.
नई दिल्ली. 17 जुलाई. मार्बल कारोबार और कारोबारियों को सीलिंग से राहत देने के लिए राजौरी गार्डन मार्बल डीलर एसोसिएशन द्वारा राजौरी गार्डन रिंग रोड पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया गया. इंडियन ओवरसीज तथा कोटक महिंद्रा बैंक के पास इस प्रदर्शन में सैंकड़ो मार्बल व्यापारियों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इस दौरान राजौरी गार्डन मार्बल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंघल, महासचिव महिंद्र सेतिया, कोषाध्यक्ष आनंद प्रकाश जाजू एवं समिति के सदस्यों सहित सैंकड़ों लोग मौजूद रहे.
राजौरी गार्डन मार्बल डीलर एसोसिएशन के चेयरमैन नवरतन झंवर ने कहा, कि बिना किसी नोटिस के की गई यह सीलिंग प्रक्रिया पूरी तरह अवैध है। उन्होंने कहा कि इस सीलिंग से मार्बल उद्योग का भारी नुकसान हो रहा है. आज मार्बल व्यापारी, कर्मचारी और उनका परिवार मुश्किल में हैं. मार्बल व्यवसायी प्रवीण गोयल ने कहा, कि मार्बल डीलर एसोसिएशन और कर्मचारी सीलिंग का विरोध करते हैं और सील हुई प्रॉपर्टीज को तुरंत डी-सील करने की मांग करते हैं.  यह भी पढ़ें : पार्टी से अनुसूचित जाति वर्ग के अलगाव पर चेताते हुए शांत प्रकाश जाटव ने भाजपाध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखा मार्बल व्यवसायियों ने कहा कि 2021 के मास्टर प्लान को मानने की बजाय 19 अप्रैल की सीलिंग को सही साबित करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी ने एसडीएम को रिंग रोड को 210 फीट (63.8 मीटर) चौड़ी दिखाने के लिए मजबूर किया, जबकि एमपीडी 2021 में यह 60 मीटर चौड़ी ही है. एक आरटीआई के जवाब में लोक निर्माण विभाग ने कहा है कि यहां रिंग रोड की चौड़ाई 60 मीटर है. इस माप के आधार पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 99 संपत्ति स्वामियों को शनिवार 13 जुलाई को नोटिस जारी कर कहा है कि वे 48 घंटे के अंदर अतिक्रमण हटाएं. इसमें कानूनन स्वामित्व साबित करने के लिए कोई नोटिस नहीं है.
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि एन.के. इंजीनियर्स नाम की एक कंपनी द्वारा किए गए सीमांकन के तीन वर्षों 2008, 2010 और 2018 की रिपोर्ट रिकार्ड में है. इसके मुताबिक एक ही कंपनी, एक ही रिपोर्ट में अलग-अलग चीज दिखा रही है. 2008 और 2010 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है, कि राजा गार्डन चौक से मायापुरी चौक के बीच रिंग रोड पर किसी संपत्ति स्वामी द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं है. जबकि 2018 की नई रिपोर्ट निगरानी समिति के दबाव में बनाई गई है. इस रिपोर्ट की खामियों पर सवाल उठाते हुए व्यवसायियों ने कहा है, कि एन.के. इंजीनियर्स की 2 जुलाई की रिपोर्ट में कहा गया है, कि निगरानी समिति के 29 जून के निर्देशानुसार एन.के. इंजीनियर्स को यह काम सौंपा गया कि वे रिंग रोड के सीमांकन का सर्वेक्षण करें। इसके लिए एन.के. इंजीनियर्स ने 02 जुलाई को रिपोर्ट सौंप दी. व्यापारियों का आरोप है, कि इन तीन दिनों के बीच में कोई कार्य दिवस ही नहीं था, जिससे इनके गलत इरादों का पता चलता है.
व्यापारियों ने कहा है, कि किसी भी संपत्ति स्वामी ने कोई अतिक्रमण नहीं किया है, इसका एक और सबूत यह है कि ऊपर बताये गए दो बिन्दुओं के बीच कई ऐसे हिस्से हैं जहां सीमांकन का काम किया गया है और जहां फुटपाथ बने हुए हैं. ये सड़क के केंद्र से माप कर मास्टर प्लान के अनुसार ही बनाए गए होंगे और 15 साल पहले बने थे. जाहिर है, फुटपाथ अतिक्रमण हटाकर बनाए गए होंगे और इसे सही व पूरी माप माना जा सकता है. यही नहीं, सभी 99 संपत्ति स्वामियों के पास उनकी अपनी संपत्ति के वैधानिक दस्तावेज हैं और यह उनके वास्तविक व दस्तावेजी क्षेत्र से मेल खाती है.
यही नहीं, जिन 99 संपत्ति स्वामियों को नोटिस सौंपे गए हैं, उनमें से 60, 21 जुलाई 2010 को ही दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा जीत चुके हैं. इसमें एसडीएम, मॉनिटरिंग समिति और लोक निर्माण विभाग भी पक्ष थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here