Home State News चुनाव प्रक्रिया में शुचिता के लिए मीडिया निभाए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी- अश्वनी उपाध्याय

चुनाव प्रक्रिया में शुचिता के लिए मीडिया निभाए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी- अश्वनी उपाध्याय

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Ashwani Updhyay. File Photo
संदीप त्यागी.
नई दिल्ली. 25 जून. भारतीय मतदाता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अश्वनी उपाध्याय ने आने वाले 2019 के आम चुनाव में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है, कि चुनाव प्रक्रिया में शुचिता लाने के मीडिया महत्वपूर्ण निभा सकता है. उपाध्याय ने कहा कि सभी राजनैतिक दल 2019 में होने वाले चुनाव के लिए बडे जोर-शोर से योजनाएं बनाने और भूमिका तैयार करने में लग गये हैं. उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव बेहद खर्चीला और अत्यधिक संघर्षमय होने वाला है. ये सब बातें कर्नाटक में हुए चुनाव से भी कुछ कदम और आगे बढ़ सकती हैं. धनबल और बाहुबल का बोलबाला और बढ़ सकता है.
ऐसे में भारतीय मतदाता उलझन में है, कि धनबल और बाहुबल को कैसे प्रभावहीन किया जाए? मतदाता किस तरह से राजनैतिक दलों पर प्रभाव डाल सकते हैं, कि वे चुनाव जीतने के लिए देशहित के खिलाफ आपराधिक तत्वों को स्थान व टिकट न दें? उपाध्याय ने कहा कि भारतीय मतदाता का अधिकार है, कि वह हर प्रत्याशी के बारे में पूरी जानकारी ले सके और चुनाव आयोग का कर्त्तव्य है, कि प्रत्याशी के बारे में पूरी जानकारी मतदाताओं को दी जाए. यह भी पढ़ें : कश्मीर पर भाजपा का समर्थन वापसी का फैसला जनभावनाओं का सम्मान- मोहन गर्ग  उन्होंने कहा कि अपराधी पृष्ठभूमि के प्रत्याशी को नामांकन के समय डिक्लेरेशन तो दिया जाता है, लेकिन उसके दुष्कर्मों और कुकृत्यों की जानकारी ज्यादातर मतदाताओं तक नहीं पहुंचती. इसलिए भारतीय मतदाता संगठन चाहता है, कि ऐसे दागी प्रत्याशियों के नाम के आगे चुनाव आयोग सबकी जानकारी वाला चिहृन लगाये, ताकि भोले-भाले मतदाता ऐसे आपराधिक प्रत्याशी को वोट देने से बच सकें. धनबल के प्रभाव को घटाने के लिए चुनाव आयोग से अपील की गई है, कि वह अत्यधिक खर्च करने वाले प्रत्याशी, चाहे वह जीतने वाला हो या हारने वाला, उन पर स्वत: संज्ञान लेकर केस चलाएं और 20 वर्ष के लिए अयोग्य भी घोषित करे. ऐसे आपराधिक प्रत्याशी की जीती हुई सीट भी खाली करवाई जाये. अगर इन सुझावों पर अमल किया जायेगा तो अपने आप चुनाव कम खर्चीले और साधारण हो जाएंगे. ऐसे में चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च करने वाले नहीं, बल्कि सेवाभावी लोगों को स्थान मिलेगा.
इसके अलावा चुनाव आयोग और कानून, राजनैतिक दलों पर अंकुश लगाए. सुनिश्चित किया जाये कि घोषणा पत्र बढ़ा-चढ़ाकर ना दिया गया हो, स्पष्ट हो और वादे पूरा करने की सक्षमता और साधनों की उपलब्धता भी बताने वाला हो. इसके अलावा प्रत्येक प्रत्याशी अपने क्षेत्र में अपना क्षेत्रीय घोषणा पत्र अलग से दे.
उपाध्याय ने कहा कि प्रेस, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया वास्तव में लोकतन्त्र की सुरक्षा करने वाला चौथा स्तम्भ है. सभी मीडिया से संबंधित लोगों से अपील है, कि वे देशहित में लोकतन्त्र की सुरक्षा के लिए उपरोक्त विषयों और अन्य विषयों जैसे चुनाव को निष्पक्ष, निर्भीक, कम खर्चीला, धनबल-बाहुबल से बचाने वाली बातों को ज्यादा से ज्यादा प्रकाश में लायें. खासतौर से दागी और अधिक खर्च करने वाले प्रत्याशियों का पदार्फाश कर मीडिया चुनाव प्रक्रिया की सफाई में योगदान दे सकता है. ऐसा करना मीडिया के लिए भी उपर्युक्त होगा, ताकि संवाद की स्वतंत्रता एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भविष्य में भी लोकतन्त्र व्यवस्था में सुरक्षित रह सके. युवा अधिवक्ता ने कहा कि मीडिया अपनी ताकत पहचाने और लोकतन्त्र, लोकतान्त्रिक संस्थाओं एवं लोकतन्त्र के मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रयास करे. लोकतन्त्र की मजूबती में ही देश का भविष्य है.

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