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एससी एक्ट में बदलाव के निर्णय पर उदितराज ने जताया अफसोस, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को जातिगत पूर्वाग्रह से प्रेरित बताया

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फाईल फोटो
संवाददाता.
नई दिल्ली. 21 मार्च. सांसद डॉ. उदित राज ने आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के ऊपर दिए गये निर्णय पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट को इस कानून को शक्ति से लागू करना चाहिए, उसी ने इसको कमजोर किया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में दलित उत्पीड़न में 66 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. इस दौरान रोजाना 6 दलित महिलाओं से दुष्कर्म और हर 15 मिनट पर आपराधिक घटनाएं हुर्इं हैं. यह भी पढ़ें : पहले नवरात्र पर आयोजित ओबीसी सम्मेलन में कई गणमान्य सम्मानित सांसद ने कहा कि इस कानून के तहत 2 से 6 प्रतिशत तक मामलों में ही सफलता मिली, क्योंकि एफआईआर दर्ज होने से मुकदमे की बहस तक समझौता होता रहता है. इसलिए कम ही मामलों में सजा मिल पाती है. डॉ. उदितराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दुरुपयोग की स्थिति में जब यह हाल है, तब इस निर्णय के बाद इस कानून का महत्व लगभग समाप्त हो जायेगा. उन्होंने कहा कि इस निर्णय में यह भी दलील दी गयी है, कि ऐसे मामले में सजा कम हुई है तो इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इसका दुरुपयोग हो रहा है. जबकि दूसरा भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है, कि इस कानून का उपयोग व्यवस्था की कमियों की वजह से नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर इसे आधार मान भी लिया जाये तो दहेज के मामले में भी 2 प्रतिशत मुकदमों में ही सफलता मिली है, तो इस तरह से वहां कहीं ज्यादा दुरुपयोग है.
डॉ. उदित राज ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि जातिगत पूर्वाग्रह से प्रेरित भी है. उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का दुरूपयोग नही होना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि उस कानून का उपयोग ही ना हो सके.

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