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दिल्ली का विकास सिर्फ कांग्रेस कर सकती है- विक्रम लोहिया

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विक्रम लोहिया, कांग्रेस नेता
राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद से सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. प्रदूषण, भ्रष्टाचार, सीलिंग, बेरोजगारी जैसे तमाम मुद्दों पर विपक्षी दिन-ब-दिन अपनी आवाज मुखर कर रहे हैं. बीते दो विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी जमीन पूरी तरह खो चुकी कांग्रेस इसे अपनी वापसी के मौके के तौर पर देख रही है. दिल्ली के कद्दावर कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली की भाजपा से कांग्रेस वापसी से पार्टी का आम कार्यकर्त्ता भी उत्साहित है. उसे लगता है, कि अब पार्टी कुछ सकारात्मक करने की ओर कदम बढ़ा रही है. बीते 22 वर्षों से यूथ कांग्रेस से लेकर प्रदेश कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाने वाले तथा मौजूदा वक्त में दिल्ली प्रदेश सचिव के पद पर नियुक्त विक्रम लोहिया इस बदलते घटनाक्रम को किस तरह से देखते हैं. राजधानी के तमाम मुद्दों पर हमने उनसे बात की.

आने वाले समय में कांग्रेस किस तेवर में दिखेगी?
हम पूरी तैयारी के साथ अपने पुराने कार्यों को लेकर जनता के सामने जा रहे हैं. क्योंकि कांग्रेस के कार्यकाल में ही दिल्ली का विकास हुआ है और मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकारआने के बाद दिल्ली विकास के रास्ते से डिरेल ही हुई है. यह अब आम आदमी समझ रहा है. राजधानी की जनता आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और नौटंकियों से परेशान हो चुकी है.
मौजूदा वक्त में चुनाव हो तो कांग्रेस कहां ठहरेगी?
कम से कम आम आदमी पार्टी की सरकार इस बार नहीं बनने वाली. दिल्ली की जनता ने पिछली बार उन्हें एक नई तरह की राजनीति के लिए चुना था. उन्होंने जनता से जो भी वादे किए, उन्हें पूरा नहीं कर सके. अब राजधानी की जनता बखूबी समझ चुकी है, कि दिल्ली का विकास सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है.
आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली कांग्रेस की अगुवाई कौन करेगा?
पार्टी आलाकमान संगठन और दिल्ली के हित को ध्यान में रखते हुए जो भी फैसला करेगा, वह सभी कांग्रेसजनों को मंजूर होगा. अब राजधानी में कांग्रेस का संगठन फिर से मजबूत हो रहा है. निगम चुनाव से पहले भाजपा में गए वरिष्ठ नेता अरविंदर सिंह लवली फिर से वापस लौट आए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी पुरजोर तरीके से पार्टी के साथ खड़ी हैं. इसलिए कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है और पार्टी अपने बेहतर समय की ओर आगे बढ़ने की राह पर है.
भ्रष्टाचार के दाग से कैसे पार पायेगी कांग्रेस?
कांग्रेस ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी. हमारे कार्यकाल में जितने भी भ्रष्टाचारी थे, हमने सबको जेल भेजा. जिसमें कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोपी के तौर पर पार्टी के अपने नेता सुरेश कलमाड़ी को भी नहीं बख्शा गया. लेकिन बाद में क्या हुआ है, यह आज पूरा देश जानता है. जिस टू जी घोटाले का शोर मचाकर भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी सत्ता में आई, उसका न्यायालय में क्या निर्णय हुआ, यह सबको पता है. यह भी पढ़ें : ई कॉमर्स में अनियमितताओं पर कैट ने उठाये सवाल, सरकार पर विदेशी कंपनियों को सहारा देने का आरोप 
लेकिन जब कार्रवाई होती है तो उसे कांग्रेस राजनैतिक बदला कहती है
कार्ति चिदंबरम के मामले में निश्चित तौर पर भाजपा राजनैतिक बदले की कार्रवाई कर रही है.भाजपा खुद पर लगे आरोपों से बचने के लिए पॉलिटिकल वेंडेटा का इस्तेमाल कर रही है. यह मौजूदा सरकार की कथनी और करनी के फर्क को दिखाता है. भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा अगर इतनी ही जीरो टॉलरेंस की नीति पर है तो अमित शाह के बेटे जय शाह को अभी तक क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया? विजय माल्या को क्यों देश नहीं लाया गया? और स्विस बैंक में छुपा काला धन मोदी सरकार क्यों नहीं ला पाई? इन सभी विषयों पर बांधे तो पार्टी कभी बात ही नहीं करती और जब जनता उनसे सवाल पूछती है तो वह विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार करके अपनी पीठ थपथपाने लग जाती है.

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