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मौजूदा राजनीतिक सिस्टम को बस मतदाता ही सुधार सकता है, स्वार्थी और अयोग्य उम्मीदवारों को वोट न दें- डॉ. रिखबचंद जैन

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Dr. Rikhab Chand jain, File Photo
आपका मत.
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव शीघ्र होने वाले हैं, इसलिए इस वर्ष मतदाता दिवस पर भारत के मतदाताओं को और अधिक जागरुक होने का प्रयास करना है. गिरते हुए राजनैतिक स्तर, राजनीतिज्ञों की आपसी तू-तू, मैं-मैं, झूठे-सच्चे आरोप लगाने की प्रवृति, भ्रान्तिपूर्ण झूठी फेक न्यूज, सोशल नेटवर्किंग द्वारा अफवाह फैलाने का काम, राजनैतिक पार्टियों के धनबल-बाहुबल का दुरूपयोग, अपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को चुनाव में टिकट देना आदि दूषित वातावरण में प्रत्येक मतदाता को सोच-समझकर अपना वोट देना है. कोई भी मतदाता वोट न बेचे. वोट के बदले में नकद, गिफ्ट, शराब, सामान आदि न ले.
जाति, धर्म, लिंग, रंग, क्षेत्र के आधार पर वोट न दे. वोट सिर्फ योग्य, नि:स्वार्थ और सेवाभावी उम्मीदवार को ही दे. अहिंसा में विश्वास करने वाली पार्टी और प्रत्याशी को ही वोट दे. हिंसा एवं नफरत के रास्ते चलने वाले अतिवादी, आतंकवादी को वोट न दे. अपराधी व्यक्ति राज्यसभा, लोकसभा और विधानसभा में न पहुंच पायें, इसके लिए अक्तूबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कानून लाने के लिए निर्देश दिये. भारतीय मतदाता संगठन बराबर सरकार, कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के सम्पर्क में है, लेकिन सरकार की ऐसा कानून लाने की कोई मंशा नहीं दिख रही है. पिछले 5 राज्यों के चुनाव में भी पार्टियों ने कोई ख्याल नहीं रखा और अपराधी छवि के प्रत्याशियों को जमकर टिकट बांटे. आपराधिक विवरण चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अखबारों में प्रत्याशियों एवं पार्टियों द्वारा नहीं छापा गया. ऐसी अनुपालना न करने वाले प्रत्याशियों पर कोई कार्यवाही भी नहीं हो रही है.
यह अब समझ में आ गया है, कि राजनीतिक पार्टियां और राजनीतिज्ञ अपने आप नहीं सुधरेगें और न ही लोकतन्त्र को सुधारेंगे. मतदाताओं का निवेदन, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, विभिन्न प्रबुद्धजनों का संकेत सब कुछ निष्फल है. लोकतन्त्र में मतदाता ही अंतिम निर्णायक होता है. वहीं अब कुछ करे तो बात बने. यह भी पढ़ें : अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों हेतु समीक्षा बैठक में बोले इंद्रेश कुमार हमारा मिशन कहीं पीछे नहीं छूटना चाहिए भारत के मतदाताओं सब एक हो जाओ. एक भी मतदाता किसी भी अपराधी प्रत्याशी को वोट न दे. कोई भी प्रत्याशी धनबल-बाहुबल का दुरुपयोग न करे. यह अपने क्षेत्र में मतदाता संगठित हो कर सुनिश्चित करें. जागरुक मतदाता ही लोकतन्त्र को बचाव कर सकता है तथा लोकतन्त्र में गुणात्मक सुधार ला सकता है. ऐसे में जरूरी है, कि प्रत्येक मतदाता अपना कर्तव्य समझे. वोट देना उनका अधिकार है. अच्छे लोकतन्त्र के लिए अच्छे जनप्रतिनिधि लाना भी उनका कर्तव्य है. लापरवाही या बहकावे में गलत व्यक्ति को वोट देकर आप लोकतन्त्र को खतरे में डाल सकते हैं. भ्रष्टाचार, महंगाई बढ़ा सकते हैं. सीधी सी बात है, ऐसा होगा तो जनता की आशाएं विफल ही होंगी.
सही जनप्रतिनिधि ही सही सरकार बना सकते हैं. कार्यकर्ता वर्ग मतदाता मित्र बनें और अपने क्षेत्र, मोहल्ले, अपार्टमेन्ट बिल्डिंग में सभी को वोट देने के लिए प्रेरित करें. बिना वोट दिए कोई न रहे. वोट सोच-समझकर, विवेक से, सही व्यक्ति को ही दें।
जय हिन्द।
(डॉ. रिखबचन्द जैन, लेखक भारतीय मतदाता संगठन के संगठन प्रमुख हैं)

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