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बाल मजदूरी पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले राजनाथ सिंह, कहा बाल मजदूरी की इजाजत नहीं देता कोई भी सभ्य समाज

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The Union Home Minister, Shri Rajnath Singh at the National Conference on Child Labour, organised by the Ministry of Labour and Employment, in New Delhi on September 26, 2017. The Minister of State for Labour and Employment (I/C), Shri Santosh Kumar Gangwar, Nobel Peace Laureate, Shri Kailash Satyarthi and the Secretary, Ministry of Labour & Employment, Smt. M. Sathiyavathy are also seen.
संवाददाता/एजेंसी.
नई दिल्ली. 26 सितंबर. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज यहां भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बाल श्रमिक सम्मेलन में बाल मजदूरी निषेध पोर्टल के कारगर कार्यान्वयन के लिए मंच (पेंसिल) का शुभारंभ किया. पेंसिल एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है, जिसका लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकारों, जिला स्‍तरीय प्रशासन, सिविल सोसायटी और आम लोगों को शामिल करते हुए बाल श्रमिक मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम करना है. श्री सिंह ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानूनी फ्रेमवर्क लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी जारी की. एसओपी का उद्देश्य प्रशिक्षकों, अधिवक्‍ताओं और निगरानी एजेंसियों के लिए एक मार्गदर्शक तैयार करना है ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और जोखिमपूर्ण श्रम से किशोरों की संरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसका अंतिम उद्देश्य भारत को बाल मजदूरी से मुक्त करना है. कर्नल राज्‍यवर्धन सिंह राठौर ने राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन कि‍या  पोर्टल का उद्घाटन करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी सभ्य समाज बाल मजदूरी की अनुमति नहीं दे सकता. उन्होंने कहा बाल मजदूरी एक अभिशाप है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संकल्प से ही इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है.राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के करो या मरो के संकल्प के पांच वर्ष बाद देश आजादी प्राप्त कर सका तो कोई कारण नहीं है कि यदि भारत एकजुट होकर बाल मजदूरी को समाप्त करने का संकल्प ले ले तो अगले पांच वर्षों में बाल मजदूरी मुक्त समाज का निर्माण न किया जा सके.
श्री सिंह ने कहा कि भारत द्वारा बाल मजदूरी संबंधी संधियों की पुष्टि करना इस बात का प्रमाण है, कि हम समयबद्ध तरीके से बाल मजदूरी खत्म करने के प्रति संकल्पबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि इस बारे में सामाजिक जागरूकता जरूरी है. इस अवसर पर उन्होंने ‘आॅपरेशन स्माइल’ का उदाहरण दिया जिसके अंतर्गत 70,000 से 75,000 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया था. उन्होंने कहा कि पेंसिल पोर्टल की सफलता के लिए भी देश में एक महीने का विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यह अभियान ब्लॉक स्तर पर भी चलाया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति जागरूक बने और बाल मजदूरी समाप्त करने की दिशा में काम करे.
नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित और बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्‍यार्थी इस अवसर पर सम्‍म‍ानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे. ‘पेंसिल’ पोर्टल की शुरूआत पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है. भारत विश्‍व को यह बता रहा है, कि वह बच्‍चों के हाथों में पेंसिल थमाएगा न कि काम करने के औजार. उन्‍होंने कहा कि पेंसिल और एसओपीज न सिर्फ भारत के लिए बल्कि समूची दुनिया के लिए महत्‍वपूर्ण हैं क्‍योंकि ये एक नयी दिशा दिखाते हैं.

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