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सीलिंग के नाम पर राजनीति, क्रेडिट लेने के लिए लंबी खिंच रही प्रक्रिया

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी, मैं आपके लेखों का नियमित पाठक हूँ. एक व्यापारी हूँ. वर्तमान परिस्थितियां तो किसी से छुपी नहीं हैं. हर तरफ हाहाकार है, व्यापार ठप्प हो गया है. भविष्य की तस्वीर भी कुछ साफ नजर नहीं आ रही है. सरकारी सिर्फ सीलिंग के मुद्दे पर राजनीति कर रही है. सब-कुछ धुंधला सा है. कृपया बताएं और वर्तमान स्थिति का सही मूल्यांकन कर व्यापारी वर्ग की मदद करें. – समीर आहूजा
Girish Sharma, Property Conslutant
उत्तर- समीर जी, वर्तमान में दिल्ली की परिस्थिति तो अब जगजाहिर हो चुकी है. आज दिल्ली का अधिकतर व्यापारी लगातार पिछले 10 सालों से कन्वर्जन चार्ज देकर भी अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है. पिछले दिनों जब पुलिस-प्रशासन के सामने उत्तम नगर क्षेत्र में व्यापारियों ने खुद ही अपनी दुकानों की सील तोड़ दी और मॉनिटरिंग कमेटी को खदेड़ दिया. इस बात को अन्यथा ना लेकर एक महीने से लगातार चल रही सीलिंग को लेकर छोटे व्यापारियों के मन में जो आक्रोश है, वह देखने को मिला. मैं अपने नजरिए से इसको इस तरह देखता हूँ जैसे किसी डॉक्टर की गलती से एक बेगुनाह मरीज मारा जाता है. और डॉक्टर पर किसी भी तरह की आंच नहीं आती.
सन् 2004 से लेकर 2007 तक बड़े-बड़े अधिकारियों द्वारा बनाया हुआ सन् 2021 का मास्टर प्लान सन् 2018 तक भी लागू नहीं हो पाया. इसकी सीधे-सीधे जिम्मेदार सरकारें हैं, ना कि व्यापारी. मैं आज ही आपको अपनी दूरंदेशी के मद्देनजर डंके की चोट पर एक बात बता देता हूँ कि अब भी सीलिंग के मामले में सिर्फ सियासत और सभी व्यापारियों से पेनाल्टी के रूप में कन्वर्जन चार्जेस द्वारा पैसा इकट्ठा करने के अलावा और कुछ नहीं हो पाएगा. आखिर में सभी राजनीतिक पार्टियों को धता बताकर भारतीय जनता पार्टी केंद्र से दिल्ली के किसी अपने राजनीतिक चेहरे को आगे कर कोई नया अमेंडमेंट लाकर सारा श्रेय ले जाएगी. जिसका जीता-जागता उदाहरण पिछले दो-तीन दिनों के सरकारी क्रिया-कलापों से पता चल रहा है. विभिन्न विभागीय सदस्यों की बैठक में लिए गए फैसलों पर अभी बहस होगी और सर्वसम्मति बन जाने के बाद आधिकारिक रूप से नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. इसमें 15 दिन से लेकर महीने भर तक का समय भी लग सकता है. केंद्र सरकार सारा श्रेय लेने के लिए यह सारा क्रम बहुत लंबा खींच रही है. यह भी पढ़ें : राजधानी में सीलिंग ने मचाई तबाही, डिप्रेशन के चलते बीमार पड़े बहुत से व्यापारी…  अब भी समय है कि बड़ी सख्ती से सन् 2018 के बाद किए हुए किसी भी तरह के अतिक्रमण को उसी समय भारी जुर्माना लगाकर बंद करवा दिया जाए. और सन् 2018 से पहले की सभी तरह की सभी संबंधित गतिविधियों का निपटारा धीरे-धीरे कुछ पेनाल्टी लगाकर रेगुलेराइज कर दिया जाए. मेरी नजर में तब तो समस्या का समाधान हो सकता है, अन्यथा भगवान ही मालिक है.
असल में समस्या की जड़ पर ना ही तो सरकार और ना ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय जाना चाह रहा है. मेरी नजर में समस्या की जड़ यह है, कि दिल्ली के क्षेत्रफल और उसकी कुल आबादी के अनुसार जितनी कमर्शियल गतिविधियों के लिए तरतीब से बसाई हुई कमर्शियल जगह चाहिए, इतनी जगह आज तक कोई सरकार ना तो बना पाई है ना ही भविष्य में बना पाएगी. इसीलिए दिल्ली की इस व्यवस्था को आज तक बन चुकी अव्यवस्थित कमर्शियल मार्किट और व्यापारिक गतिविधियों को रेगुलेराइज करने के अलावा और कोई चारा नहीं है. क्योंकि आज भी कॉरपोरेशन यह नहीं बता सकती कि आज तक जो कन्वर्जन चार्ज लिया है, वह पैसा कहां गया? क्योंकि अमूमन यह कहा जाता है, कि वह पैसा उसी मार्किट में लगता है. उपरोक्त विस्तृत व्यवस्था के बाद यह कहना उचित ही होगा कि मेरी दूरंदेशी सच होती नजर आ रही है, तो माननीय उच्चाधिकारियों को यह सब समझ नहीं आता या अनदेखा करना चाहते हैं.
और अधिक जानकारी के लिए गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.)  पर जाकर उनके पिछले लेख पढ़ सकते हैं और समय लेकर मिल भी सकते हैं.

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