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‘रेरा’ के चलते नियमित हो रहा बाजार, ग्राहकों में बढ़ा भरोसा

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी, मैं भी रियल एस्टेट कंसल्टेंट हूँ. बीते 12 वर्षों से इसी क्षेत्र में कार्यरत हूँ. पिछले वर्षों में मार्किट का माहौल काफी हलचल भरा रहा. पूरा रियल एस्टेट सेक्टर मानो अनिश्चितता की स्थिति में जी रहा था. ग्राहक और बिल्डर्स दोनों ही इस माहौल को अपने मुताबिक नहीं पा रहे थे. ऐसे में ‘रेरा’ कानून किस प्रकार की आशा की किरण मार्किट में लेकर आया है? कृपया बताएं. और मैं एक नामी-गिरामी बिल्डर के प्रोजेक्ट में एक घर बुक करना चाहता हूँ तो क्या यह उचित समय है? – नितिन आचार्य, नोएडा
Girish Sharma, Property Conslutant
उत्तर- नितिन जी, आपने बिल्कुल सही मार्किट का आंकलन किया है. नए रियल एस्टेट कानून से भी घर खरीदने के मामले में लोगों का भरोसा बढ़ा है. मकान को खरीदने से संबंधित जो जद्दोजहद एक खरीददार न जाने कितने वर्षों से करता आ रहा था, उसका समाधान सरकार ने ‘रेरा’ कानून पास करके कर दिया है. इस कानून ने न केवल खरीददारों को अपितु बिल्डरों को भी झंझटों से छुटकारा दिलाने का काम किया है. एक खरीददार जब मकान लेता था, तब वह मकान से संबंधित कागजातों को चेक कराने के लिए न जाने कहां-कहां मारा-मारा फिरता था. लेकिन फिर भी उसे भरोसेमंद उत्तर नहीं मिल पाता था, जिससे कि वह संतुष्ट होकर और एक सुकून भरे मन से मकान खरीद सके. परंतु अब यह सिर्फ एक क्लिक में संभव हो पा रहा है. घर खरीददारों एवं बिल्डर्स दोनों को ‘रेरा’ ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया है, जहां निर्माण कार्य से लेकर लोकेशन तक और मंजूरियों से लेकर परियोजना की स्थिति तक की जानकारी महज एक क्लिक पर मिल रही है. इस कानून ने ग्राहक और बिल्डर के बीच पारदर्शी एवं सुंदर रिश्ता कायम कर दिया है.  यह भी पढ़ें : बढ़ती वाहनों की भीड़ बढ़ा रही है तनाव, संयम से काम लें ग्राहकों में भरोसा जगा है, कि यदि हम ‘रेरा’ अप्रूव बिल्डर से घर ले रहे हैं तो कम से कम हम धोखाधड़ी के शिकार तो नहीं होंगे. और जिस तय सीमा में हमें बिल्डर ने घर देने का वादा किया है, उस सीमा में हम अपने आशियाने में शिफ्ट हो पाएंगे. किसी प्रकार की शंका की इसमें गुंजाइश नहीं है. बाजार को और अग्रसर करने में ग्राहक एवं बिल्डर का विश्वास बड़ा फैक्टर होता है. यह भरोसा बाजार को पनपने में भी सहायता करता है. ‘रेरा’ रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की जानकारी के लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, सभी जानकारियां आॅनलाइन उपलब्ध हैं. बिल्डर को हर तिमाही में अपने प्रोजेक्ट की पूरी उपलब्धि साइट पर अपलोड करनी होती है. जैसा कि ‘रेरा’ कार्यालय के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि यहां फुटफॉल जीरो है. आॅनलाइन सूचना से समय और धन दोनों की बचत होती है, जो कि एक बहुत बड़ा फैक्टर है. एक क्लिक और सारी सूचना आपके सामने. इस सुविधा का लाभ हर ग्राहक को जरूर उठाना चाहिए. रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी द्वारा रजिस्टर्ड बिल्डर को एक नंबर दिया जाता है, जो कि उस बिल्डर की पहचान है. अब ग्राहक अपना पैसा बेझिझक रियल एस्टेट सेक्टर में लगा रहे हैं और यह संभव हुआ है ‘रेरा’ कानून आने से. अब ग्राहकों के मन में यह बात घर कर गई है, कि हमारा पैसा सेफ है. कोई इसे मार नहीं सकता और निर्धारित समय सीमा में हम अपना घर प्राप्त कर सकते हैं. ‘रेरा’ के आने से बाजार नियमित होना शुरू हुआ है. एक भरोसे का माहौल उत्पन्न हो रहा है, क्योंकि कोई भी बड़ा बिल्डर ‘रेरा’ रजिस्ट्रेशन के बिना अपने प्रोजेक्ट का विज्ञापन भी नहीं दे सकता. खरीददार से लिए पैसे का 70 फीसदी हिस्सा उसे उसी प्रोजेक्ट में लगाना होगा और खरीददार को अगर समय पर घर नहीं मिलता तो पूरा पैसा ब्याज सहित वापस ले सकता है. नहीं तो घर मिलने तक ब्याज प्राप्त कर सकता है.
जिन राज्यों में अभी तक स्पष्ट रूप से यह कानून लागू नहीं हुआ, आशा है कि उनमें भी दूसरे अन्य राज्यों में इस कानून की सफलता को देख यह जल्दी लागू हो जाएगा.
और अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.) पर जाकर उनके लिखे ज्ञानवर्धक लेख देख सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

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