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फिर लौटा सीलिंग का भूत, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीलिंग व तोड़-फोड़ जारी रखने के निर्देश

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सांकेतिक चित्र
संवाददाता.
नई दिल्ली. 21 जुलाई. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीलिंग व तोड़-फोड़ जारी रखने के निर्देश से मास्टर प्लान में संशोधन के बावजूद सीलिंग पूरी तरह बंद होने के शहरी विकास मंत्रालय के दावे पर पानी फिर गया है. एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष रहे अर्बन मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने कोर्ट द्वारा अतिक्रमण व अवैध निर्माण
jagdish mamgain. Bjp Leader
के जिम्मेदार बिल्डर, ठेकेदार की सूची बनाने व उन्हें ब्लैकलिस्टेड करने के आदेश का स्वागत करते हुए सरकारी एजेंसियों की करीब 80,000 हेक्टेयर जमीन अवैध रूप से हथियाने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की है. यह भी पढ़ें : स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया, रोटरी क्लब की नई टीम का शपथ ग्रहण समारोह गौरतलब है, कि मास्टर प्लान 2021 में डीडीए द्वारा संशोधन करने की प्रक्रिया के चलते नगर निगमों द्वारा 15 मई 2018 से सीलिंग प्रक्रिया रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताते हुए स्पष्ट किया कि सीलिंग व तोड़-फोड़ रोकने का सवाल ही नहीं है तथा कार्रवाई जारी रखने के लिए समुचित मात्रा में पुलिस बल उपलब्ध करने के आदेश भी दिए हैं.
ममगांई ने कहा कि वह शुरू से ही कहते रहे हैं, कि लाखों वर्ग मीटर की सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण व कब्जा करने वाले भूमाफिया एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का आज अतिक्रमण व अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार बिल्डर, ठेकेदार की सूची बनाने व उन्हें ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश स्वागत योग्य है. इसके साथ ही डीडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एलएंडडीओ, दिल्ली जल बोर्ड, रेलवे, सीपीडब्ल्यूडी आदि सरकारी एजेंसियों की करीब 80,000 हेक्टेयर जमीन अवैध रूप से हथियाने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अप्रैल 2006 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं व्यक्तियों को नामजद कर कार्रवाई करने हेतु सीबीआई जांच के आदेश दिए पर 12 साल बाद भी किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
ममगांई ने कहा कि 15 मई 2018 को अनधिकृत निर्माणों के लिए जिम्मेदार डीडीए, एमसीडी सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक मुकद्दमा दर्ज करने व निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे, लेकिन दो महीने में कार्रवाई नहीं के बराबर ही हुई है.

 

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