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सरकार के साथ संगठन को भी मजबूती से चलाना विरोधियों से सीख सकते हैं- मतीन अहमद

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मतीन अहमद, फाईल फोटो
राजधानी दिल्ली में आज व्यापारी सीलिंग से त्राहिमाम कर रहे हैं. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और व्यवस्था परिवर्तन की दुहाई देकर सत्ता में आर्इं दो सरकारें, केंद्र में भाजपा और राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा बीत चुका है. एक ओर जहां सीलिंग के मसले को लेकर दोनों ही सरकारें एक-दूसरे के साथ पूर्ववर्ती कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी अन्य नाकामियों का ठीकरा भी पूर्ववर्ती कांग्रेस के सिर ही फोड़ रही हैं. राजधानी में डेढ़ दशक तक निर्बाध शासन के बाद कांग्रेस राज्य में पूरी तरह हाशिये पर है, लेकिन मौजूदा माहौल में वह भी अपनी वापसी की आहट देख रही है. सीलमपुर विधानसभा का पांच बार नेतृत्व करने वाले कद्दावर कांग्रेस नेता मतीन अहमद दिल्ली सरकार के तीन साल के कार्यकाल को कैसे देखते हैं और क्यूं उन्हें राजधानी में कांग्रेस की वापसी की उम्मीद दिखती है समेत मौजूदा तमाम मुद्दों पर पत्रकार संदीप त्यागी ने उनसे बात की. प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश-

प्रश्न- सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच ताजा विवाद को कैसे देखते हैं. भविष्य में सरकार के कामकाज पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर- यह आम आदमी पार्टी सरकार की अदूरदर्शिता और मनमाने आचरण के कारण हुआ है. यह सरकार ब्यूरोक्रेसी के साथ उचित तालमेल नहीं बना पाई. सच यह भी है, कि ब्यूरोक्रेसी के साथ बिना तालमेल के सरकार नहीं चल सकती. हर छोटा-बड़ा काम पूरा करने के लिए सरकार को ब्यूरोक्रेसी के सहयोग की जरूरत होती है. सरकार सिर्फ नीतियां बना सकती है, जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करने का काम अंतत: ब्यूरोक्रेसी को ही करना होता है. लिहाजा अगर सरकार और ब्यूरोक्रेसी में आपसी सहयोग और तालमेल ठीक नहीं है, तो जमीनी स्तर पर काम उतारने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यह विवाद किस तरीके से सुलझेगा, अभी पता नहीं है. लेकिन यह कड़वा सच है, कि आम आदमी पार्टी का रवैय्या अधिकारियों को लेकर बेहद सौहार्दपूर्ण कभी भी नहीं रहा है, ऐसे में उम्मीद नहीं कर सकते कि भविष्य में भी चीजें बहुत सुधर जाएंगी.
प्रश्न- ‘आप’ सरकार का दावा है, कि उसने दिल्ली में बीते कुछ दशकों का सबसे बेहतर काम किया है. आपको राजधानी में बीते तीन साल में क्या फर्क दिखता है?
उत्तर- वैसे तो सभी सरकारें यही दावा करती हैं, कि उसने सबसे अच्छा काम किया. एक नजर से इसमें कुछ गलत भी नहीं है, कि सरकार अपने बेहतर कामकाज का दावा करे. लेकिन आम आदमी पार्टी की इस सरकार के कामकाज को जमीनी स्तर पर देखें, तो शायद ही इससे खराब सरकार दिल्ली को कभी मिली हो. अपनी तमाम उपलब्धियों के नाम पर इस सरकार के पास सब्सिडाइज्ड़ बिजली, पानी, जिसमें अब बहुत सी शिकायतें आम हो चुकी हैं. स्कूल के कुछ कमरे बनाना तथा हॉस्पीटल्स में दवाइयां सही से वितरित कराना शामिल हैं. हालांकि उनके चुनाव से पहले वायदे कुछ और कामों के थे, लेकिन सच यह है, कि इन चार मुद्दों पर भी यह सरकार पूरी तरह से विफल रही है. जिन हॉस्पीटल्स में सुविधाएं सुधारने को लेकर दावे किये जाते हैं, उसकी हकीकत यह है, कि उन हॉस्पीटल्स के डॉक्टर्स को मोहल्ला क्लीनिक में शिफ्ट किया गया है, जिसके चलते हॉस्पीटल्स का कामकाज भी प्रभावित हुआ है. पानी की स्थिति जस की तस है, साथ ही यह महंगा भी हो गया है. स्कूल के कमरे बनाकर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का दावा करने वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को यह भी बताना चाहिए कि क्यूं उसके टाईम में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों का आंकड़ा बढ़ा है. क्यूँ सरकार स्कूलों का रिजल्ट पहले से खराब हुआ है. इसके अलावा बिजली और पानी पर सब्सिड़ी से जो राहत दी गई थी, वह प्रॉपर तरीके से क्यूं नहीं पहुंच रही है? इसके बाद भी अगर यह सरकार दिल्ली में बेहतर काम का दावा कर रही है तो कुछ नहीं कहा जा सकता.
प्रश्न- इन तमाम खामियों के बावजूद भी दिल्ली की जनता आपके साथ नहीं है.
उत्तर- देखिए दिल्ली में कांग्रेस ने 15 साल शासन किया. लोगों को लगा कि शायद कुछ ऐसे काम हैं जो यह सरकार नहीं कर पाई है. और विरोध में लोग वैसे अतिश्योक्तिपूर्ण काम करने दावे कर रहे हैं इसलिए जनता ने आम आदमी पार्टी को चुन लिया. अगर इस सरकार से पूरी तरह मोहभंग जैसी स्थिति अभी नहीं है तो उसका कारण यह है, कि प्रोपेगैंडा में माहिर आम आदमी पार्टी की सरकार लोगों तक यह मैसेज भेजने में कामयाब रही है, कि दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार काम नहीं करने दे रही है. इसलिए शायद जनता उम्मीद करती है, कि देर-सवेर हालात बेहतर हो सकते हैं.
प्रश्न- संगठन में भी हालात कुछ बेहतर नहीं दिखते?
उत्तर- जब कोई दल सत्ता में आता है, तो संगठन कमजोर हो ही जाता है. कई बार कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होती, तो लोग इधर-उधर हो जाते हैं. इसका खामियाजा कांग्रेस को भी भुगतना पड़ा है. हालांकि मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार की यह खासियत है, कि उन्होंने काम भले ही कुछ नहीं किया, लेकिन दोनों ने ही अपने संगठन को पूरा मजबूत करने का काम किया है. इस नाते हमें उनसे भी सीखने की जरूरत है.
प्रश्न- आपने लंबे वक्त तक सीलमपुर विधानसभा का नेतृत्व किया. और अपने तमाम कामकाज के बावजूद भी आपको हार का सामना करना पड़ा. यही नहीं आप जैसे अनेकों दिग्गज धराशायी हो गए. आप लोग खुद अपनी सीट तक बरकरार नहीं रख पाये, इसका क्या कारण मानते हैं?
उत्तर- आज तीन साल के बाद मैं कह सकता हूँ कि वह हमारी व्यक्तिगत हार नहीं थी, बल्कि यह मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का प्रोपेगैंडा था, जो हमारे अच्छे काम के बाद भी जीत गया था. यह हमारा अपने काम के प्रति विश्वास ही था, कि हमें लगा कि हम जीत जाएंगे. हमारे कार्यकर्त्ताओं को भी विश्वास था, कि हमने बेहतर काम किया है. लेकिन आम आदमी पार्टी और भाजपा के विरोधी प्रोपेगैंडा के चलते हमें हार का सामना करना पड़ा.
प्रश्न- क्या वापसी की कोई संभावना दिखती है और किन कारणों से ऐसा मानते हैं?
उत्तर- निश्चित तौर पर, लोग इन दोनों ही सरकारों से परेशान हो चुके हैं. धीरे-धीरे ही सही, अब लोगों को अहसास होने लगा है, कि इन पार्टियों ने जो वायदे किए थे, वह कभी पूरे होने वाले नहीं हैं. और उनमें व्यवहारिकता भी नहीं है. ऐसे में आम आदमी पार्टी का कमजोर होना तय है, और जितना ‘आप’ कमजोर होगी, उसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा और अंतत: हम वापसी करेंगे.
प्रश्न- राजधानी में आज सीलिंग एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है. इसके बारे में कहा जा रहा है, कि दिल्ली कांग्रेस की कारगुजारियों को झेल रही है. क्या आप मानते हैं, कि उस वक्त कांग्रेस की गलती के कारण राजधानी सीलिंग के भूत से त्रस्त है?
उत्तर- हो सकता है जिन 351 सड़कों के नोटिफिकेशन के बारे में बात की जाती है, उन्हें तत्कालीन सरकार किन्हीं कारणों से ना कर पाई हो. लेकिन क्या यह सवाल उन लोगों से नहीं पूछा जाना चाहिए कि 4 साल बीतने के बावजूद भी इस मसले का हल क्यों नहीं निकला? यह दिखाता है, कि राजधानी की जनता से जुड़ा इतना संवदेनशील मुद्दा होने के बावजूद भी यह दोनों सरकारें इसका कोई निदान नहीं कर पार्इं, जबकि दोनों ही व्यवस्था परिवर्तन का दम भरते हुए सत्तासीन हुई थीं.

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