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वसुन्धरा रत्न अलंकरण समारोह में साध्वी भगवती सरस्वती ‘इन्टरनेशनल अवार्ड आॅफ एक्सेलेन्स’ से सम्मानित

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संवाददाता.
ऋषिकेश. 18 अक्तूबर. वृद्धजन सेवा समिति अन्तर्राष्ट्रीय द्वारा आयोजित 56वें वार्षिक वसुन्धरा रत्न अलंकरण समारोह एवं सार्थक संवाद तथा प्रयास कार्यक्रम में ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया. समारोह में जगद्गुरू निम्बाकार्चार्य जी, पीठाधीश्वर श्याम शरणदेवाचार्य, डॉ. योगेन्द्र, एच. ई. जगदीश्वर, हाई कमिशनर मॉरीशस समेत अन्य विशिष्ट अतिथिगण मौजूद रहे. कार्यक्रम में साध्वी भगवती सरस्वती को विश्व स्तर पर महिलाओं, बच्चों, स्वच्छता, नदियों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शान्ति की स्थापना के लिये किये जा रहे कार्यों हेतु ‘इन्टरनेशनल अवार्ड आॅफ एक्सेलेन्स’ से सम्मानित किया गया.
विदित हो कि वृद्धजन सेवा समिति एवं श्री हरिकृष्ण वरिष्ठजन सेवा निकेतन अनेक वर्षों से वरिष्ठजनों की सेवा, सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान, स्वास्थ्य हेतु समर्पित है. बच्चों एवं युवाओं में मानवीय एवं आध्यात्मिक मूल्यों को जाग्रत करने हेतु संस्थान वर्ष 1962 से कार्यरत है. यह भी पढ़ें : दुर्गा अष्टमी पर विहिप की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी की सदस्यों का शक्ति प्रदर्शन इस समारोह का उद्देश्य अपने देवतुल्य माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार तथा उनको वृद्धाश्रमों में भेजकर भारतीय संस्कृति को क्षति पहुँचाने वालों का मार्गदर्शन एवं जनजागरण करने हेतु पूज्य संतों, शिक्षाविदों, समाजसेवी, साहित्यकारों एवं सरकार का आह्वान कार्यक्रम था.
समारोह को सम्बोधित करते हुए साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति बहुआयामी संस्कृति है, जिसमें प्रकृति का कण-कण समाहित है. भारतीय संस्कृति विश्व की बहुमूल्य निधि है जो पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और समस्त प्राणीमात्र से प्रेम करना सिखाती है. उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण के इस युग में जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों का होना नितांत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास सिकुड़ती हुई सभ्यता का इतिहास नहीं है, बल्कि यह तो वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति का जन्मदाता है. साध्वी ने कहा कि आज हमें अपनी युवा पीढ़ी में इन्ही संस्कारों को रोपित करना होगा, तभी हम संयुक्त परिवार की नींव को सुरक्षित रख सकते हैं. उन्होंने कहा कि नवरात्रि पर्व आ रहा है, उसमें हम सभी दुर्गा माता की पूजा करते हैं. साथ ही अपने घरों में जो माता-पिता हैं, उनका भी सम्मान और आदर करें, यही भारत की संस्कृति है. समारोह में पधारे विशिष्ट अतिथियों ने भारतीय संस्कृति एवं वुद्धजनों की सेवा पर अपने विचार व्यक्त किये. इस अवसर पर डॉ. घनश्याम गुप्ता, विजय पोद्दार, आशीष मुखर्जी, आलोक सिन्हा, भूदेव शर्मा, लल्लन प्रसाद समेत अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे.

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