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 राजधानी में सीलिंग ने मचाई तबाही, डिप्रेशन के चलते बीमार पड़े बहुत से व्यापारी…

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश सर, पिछले कई वर्षों से लगातार आपके आर्टिकल पढ़ रहा हूँ. उससे मेरे बहुत से काम ठीक भी हुए हैं. मेरा करोल बाग में काम है. पिछले कुछ दिनों से बहुत परेशानी दिमाग में घर किए हुए है. समझ नहीं आ रहा, किससे कहूँ? आप मेरे प्रश्न का उत्तर देंगे या नहीं? खौफ, खतरा, सदमा, प्रताड़ना इन सभी के साए में व्यापारी वर्ग आजकल जी रहा है. किसी प्रकार की राहत की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है. कभी कोई सड़क, कभी कोई बाजार, सालों पुरानी बसी-बसाई मार्किट, सब पर यह सीलिंग का हथौड़ा चल रहा है. आज ऐसा लग रहा है, कि व्यापारी बनकर जिंदगी में सबसे बड़ा गुनाहगार मैं ही हो गया. किससे कहूँ, किसको बताऊं, दिमाग में एक शून्य घर कर गया है. जिंदगी को समाप्त करने तक की भावनाएं मन में उठने लगी हैं. दूसरी तरफ परिवार की ओर देखता हूँ तो मन को समझाना पड़ता है, कि ऐसा कदम उठा लिया तो इनका भरण-पोषण कैसे होगा? कुछ सोच-विचारकर ही कदम उठाना ठीक है. कृपया मार्गदर्शन करें.
– राकेश घई
Girish Sharma, Property Conslutant
उत्तर- राकेश जी, मैं आपकी भावनाओं की कद्र करता हूँ और आपकी ही तरह के प्रश्न आज के परिवेश में दिल्ली के लाखों व्यापारियों के दिल में घर कर गए हैं. और मैं हमेशा अपने विवेकानुसार समय निकालकर कर्तव्यों को सर्वोपरि रखते हुए प्रश्नों का उत्तर जरुर देता हूँ, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हों. मेरा आपसे और आप जैसे सैकड़ों छोटे व्यापारियों से हाथ जोड़कर यह निवेदन है, कि जिंदगी को समाप्त करने जैसी बातें अपने जेहन में मत लाएं. मजबूत बनें और हर कठिनाई का सामना डटकर करें. इतनी खूबसूरत जिंदगी फिर दोबारा नहीं मिलेगी. इस तरह की बहुत सी कठिनाइयां जीवन में आती-जाती रहेंगी. और यकीन मानिए उन सबका हल भी निकलेगा. आजकल जो पूरी दिल्ली में सीलिंग की समस्या चल रही है, यह केवल वर्तमान परिस्थितियों की देन नहीं है. यह आजादी से लेकर अब तक धीरे-धीरे हमारे रहनुमाओं की ही दूरंदेशी कम होने का परिणाम है. असल में हम नकल तो उन देशों की करते हैं, जिन देशों की कुल जनसंख्या भारत की राजधानी दिल्ली की जनसंख्या से भी कम है. और चाहते यह हैं, कि यहां उन देशों की ही तरह व्यवस्था स्थापित हो, जो कि किसी भी तरह संभव नहीं है. व्यवस्था स्थापित करना हमारे देश के विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों का काम है. जो कि इसमें बिल्कुल नाकामयाब रहे हैं. यह भी पढ़ें : राजधानी में मल्टीपल एजेंसीज सिस्टम ने खड़ा किया सीलिंग का भूत  जब अतिक्रमण या विभिन्न दुकानें, कार्यालय उन सड़कों पर जो कि नोटिफाइड नहीं है, खुल रहे थे तब उन्हें रोका क्यों नहीं जाता? जो व्यवसाय चल निकले, तब यह हथौड़ा उन पर चला दिया, समझ से बाहर है. किंतु इस प्रक्रिया को समझ पाने में पूरी तरह बेबस हूँ. निरुत्तर, नि:सहाय सा महसूस हो रहा है. हजारों परिवार उन पर यह विपदा, रोते- बिलखते लोग, कुछ लोग तो गंभीर अस्वस्थता का भी शिकार हो गए हैं. पिछले एक-दो दिन पहले के सामूहिक बंद ने सरकार को इस विषय पर सोचने के लिए मजबूर किया है. विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा है, कि तीनों नगर निगम ने 351 सड़कों की लिस्ट संशोधित रूप में दिल्ली सरकार को अधिसूचना के लिए भेज दी है. निगमों ने सरकार द्वारा बताई गई सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए सड़कों की अलग-अलग फाइलें बनाकर 22 जनवरी को सरकार के पास जमा करा दी हैं. और साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि उपमुख्यमंत्री ने सदन मे वादा किया था कि अगर हमें 22 जनवरी तक सरकार को निगमों से पहले मिल जाती हैं, तो सरकार तुरंत अधिसूचना जारी कर देगी. उन्होंने कहा कि व्यापारियों को सीलिंग से राहत पहुंचाना उनका फर्ज है. और अगले दो-तीन दिनों में इन मांगों को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से भी मिलेंगे. जिनमें मुख्यता उनकी मांगे रहेंगी कि 351 सड़कों की अधिसूचना तुरंत जारी की जाए. मिक्स्ड यूज पर 10 गुना वार्षिक कन्वर्जन चार्ज और 8% ब्याज देने की शर्त को माफ किया जाए.
धैर्य से काम लें, ईश्वर पर भरोसा करें. समय सब ठीक करेगा. 10 गुना वार्षिक कन्वर्जन चार्ज को हटाकर, बाकी ब्याज समेत रुपया जमा कराने के लिए एमसीडी ने फिलहाल कैंप लगा रखे हैं.
और अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.)  पर जाकर उनके पिछले लेख पढ़ सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

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