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पुलिस, प्रशासन और अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है सीलिंग

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सांकेतिक चित्र
प्रश्न- गिरीश जी, आजकल के मुद्दों में सीलिंग एवं अवैध निर्माण के साथ-साथ अतिक्रमण भी चर्चा का विषय बना हुआ है. जबसे सुप्रीम कोर्ट ने इन पर कार्रवाई करनी शुरू की है, तबसे आम जनता में डर पैदा हुआ है. लेकिन फिर भी कुछ लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं. लोगों में एक धारणा जो शुरू से घर किए हुए है, कि जब कार्रवाई होगी, तब देख लेंगे. इसमें सुधार के कितने आसार हैं? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो इसका परिणाम क्या होगा? कृपया बताएं. -मधुर भास्कर
Girish Sharma, Property Conslutant
उत्तर- मधुर जी, यह जो मुद्दे इस वक्त गरमाए हुए हैं, इन पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही सख्त रुख अपनाया हुआ है. सीलिंग, अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण को हटाने पर तो कार्रवाई जारी रहेगी. मैं तो यह मानता हूँ कि पिछले कई वर्षों से अति का माहौल हो गया है. बाजारों में चलने की जगह नहीं बची, फुटपाथ पर मनचाहे कब्जे कर लिए गए हैं. आम जनता क्या करे और कहां जाए? घूसखोरी और रिश्वत ने अपने पैर हर जगह पसार लिए हैं. आला अधिकारियों के कान पर तो जूँ तक नहीं रेंगती है. अगर कोई शिकायतकर्ता शिकायत लेकर जाता है तो वह उसे अनसुना कर देते हैं. मैं तो यही कहूंगा कि असली सजा के हकदार तो यही अधिकारी हैं. जिन्होंने इस भयावह स्थिति को पैदा करने में मदद की है. पिछले कुछ दिनों में यही खबर कान में सुनाई पड़ रही थी, कि सीलिंग को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. यह भी पढ़ें : सीलिंग पर अभी ‘वेट एंड वॉच’ ही आॅप्शन …. जबकि यह बिल्कुल गलत है. सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर याद दिला रहा है, कि राजधानी में अवैध निर्माण को सील करने या गिराने पर कोई रोक नहीं है. सख्ती का रुख अपनाते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया है, कि दिल्ली में जहां कहीं भी अवैध निर्माण नजर आए, उस कंस्ट्रक्शन को तुरंत रुकवाया जाए. और जहां कहीं भी अवैध निर्माण हुए हैं, उन पर नोटिस जारी करके 48 घंटे के अंदर जवाब मांगा जाए और कार्यवाही की जाए. इसके साथ ही अवैध कब्जों के खिलाफ सीलिंग अभियान में जुटे अधिकारियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैय्या करवाई जाए. और जो भी आर्किटेक्ट, कांट्रेक्टर एवं बिल्डर उस अवैध कंस्ट्रक्शन के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए. यह सभी उपरोक्त कार्य अधिकारियों, पुलिस, प्रशासन एवं रजिस्ट्री विभाग, सभी की मिलीभगत का नतीजा होते हैं. इन संबंधित अधिकारियों द्वारा कभी यह नहीं सोचा जाता कि चंद रुपए के लिए वह ना जाने कितने लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं. इन लोगों की रूह नहीं कांपती जब इनके कार्यों के नतीजतन बड़े-बड़े एवं दर्दनाक हादसे हो जाते हैं. उन मासूम लोगों का क्या कसूर? जो अपना पैसा भी गंवाते हैं और जान भी!
मेरी राय में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्त रुख अपनाया है वह सराहनीय है. अधिकारियों में डर होना चाहिए कि अगर हमने मापदंडों को ना मानकर किसी भी इमारत को बनने दिया और वह कुछ समय में ही मलबे में तब्दील हो गई, तो उनका क्या हश्र होगा? यह भय होना जरूरी है. नियम एवं कानून का पालन करना सबके लिए अनिवार्य होना चाहिए, तभी कुछ सुधार की उम्मीद की जा सकती है.
और अधिक जानकारी के लिए आप गिरीश शर्मा के फेसबुक पेज Shanti Properties (Regd.) पर जाकर उनके लिखें लेख देख सकते हैं और समय लेकर उनसे मिल भी सकते हैं.

 

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