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सीलिंग से त्रस्त व्यापारियों के उनके रहनुमाओं से कुछ प्रश्न

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सांकेतिक चित्र
गिरीश की कलम से-
Girish Sharma, Property Conslutant
* व्यापारी अगर रोता-बिलखता हुआ, हाथ में कटोरा लिए सड़कों पर उतरेगा तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था धूल चाटने को मजबूर नहीं हो जाएगी क्या?
* एक व्यापारी के साथ ना जाने कितने परिवार जुड़े हैं. क्या सरकार इतने लोगों को रोजगार दिलाने में सक्षम है? क्या उन सभी को बेरोजगारी भत्ता दे सकती है?
* हमारे राजनीतिज्ञों की गलतियों के कारण आज व्यापारी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर नहीं है क्या?
* क्या छोटे व्यापारी सरकार पर बोझ हैं?
* मैं समझता हूँ कि सरकारें छोटे व्यापारियों पर बोझ हैं, क्योंकि सरकार बड़े व्यापारी जैसे कि नीरव मोदी, विजय माल्या इन पर तो कोई अंकुश लगा नहीं सकती, लेकिन छोटे व्यापारियों पर हर तरह के भारी-भरकम टैक्स लगाकर उनके चलते-चलाए व्यापारों को सील करके उनकी कमर तोड़ने में लगी हैं.
* क्या व्यापारी चोर, डाकू, स्नैचर या अपहरणकर्त्ता है. यदि हाँ तो फिर वो 24 घंटे में से 12 घंटे अपनी दुकानें खोल कर मगजमारी क्यों करता है? अन्य स्टाफ रखकर उन्हें नौकरियां क्यों देता है? बिजली, पानी, सेल्स टैक्स, इन्कम टैक्स, जीएसटी आदि क्यों दे रहा है? आराम से स्नेचिंग करे और मजे ले लेकिन नहीं, हर व्यापारी इज्जत की जिंदगी जीना चाहता है. और यदि सरकार सोचती है, कि व्यापारी वाकई में ही चोर, डाकू, स्नैचर नहीं है, तो उनकी दुकानों को सील करके, उनका व्यापार तबाह करके, उनको क्राइम की तरफ धकेलने की कोशिश करने जैसा नहीं है क्या?
* आज के सीलिंग के इस परिवेश को देखकर आज की युवा पीढ़ी क्या अपना व्यापार करने के बारे में सोच भी सकती है?
* एक मध्यम वर्गीय परिवार की या छोटे व्यापारी की अपनी जिंदगी में क्या ख्वाहिशात होती हैं? क्या यह ख्वाहिश होती है, कि उसकी छत पर हेलीपैड हो और वह अपने पर्सनल हेलीकॉप्टर से उतरकर नीचे अपने घर में आ जाए? … जी नहीं ! उसकी तो केवल यही तमन्ना होती है, कि उसके बच्चे पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े हो जाएं. अपना बुढ़ापा सुधर जाए और जिंदगी के एक छोटे से सफर को पूरा करते हुए इस कशमकश में वह बेचारा राम जी को प्यारा हो जाता है.
* सरकार का सीलिंग के प्रति ढुलमुल रवैया ना जाने कितने व्यापारियों को अपने आपको मिटाने को मजबूर करने वाला है.
* व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ की हड्डी है. यह टूट गई तो देश अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं रह पाएगा. यह भी पढ़ें : व्यापारी के लिए किलिंग बन गई सीलिंग.. 
* जब अपने ही चुने हुए राजनीतिक नुमाइंदे हमारी सुध ना लें, तो लोकतांत्रिक प्रणाली भी शक के घेरे में आ जाती है.
* राजनीतिक पार्टियां सिर्फ राजनीति कर रही हैं. समस्या का समाधान क्या हो, कैसे हो? इस पर तो ध्यान दिया ही नहीं जा रहा है. आज व्यापारी एक-एक दिन खौफ की मौत मर रहा है .
* दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार किस बात का इंतजार कर रही है? गृहयुद्ध जैसे माहौल को उत्पन्न करने के लिए वर्तमान स्थिति काफी है? समय रहते कदम उठा लें, वरना तो भगवान ही मालिक है .
* ..बिसलेरी की बोतल के साथ एयर- कंडीशंड कमरों में बैठकर कभी भी, कोई भी धरातल की सच्चाई का पता नहीं लगा सकता.
* सभी सरकारों की नाकामयाबी का खामियाजा संपूर्ण व्यापारिक वर्ग भुगत रहा है. माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगा गया स्पष्टीकरण कोई भी सिविक बॉडी देने में असफल रही है.
* आज तक क्या किसी मंत्री या किसी बड़े अधिकारी को सजा मिली, जिनके राज में व्यापारियों ने अनधिकृत निर्माण किये थे.
* क्या आज की युवा पीढ़ी रोज-रोज की इस समस्या को देखते हुए विदेशों का रुख करने को मजबूर नहीं हो रही?
* सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी तो जाहिर ही है. वरना व्यापारियों को एक अदद दुकान की जगह मिले तो वह क्यों रिहायशी इलाकों में अपने व्यवसाय करेगा?
यह है एक छोटे व्यापारी और मध्यम वर्गीय परिवार की कहानी जिसे कि अब तक कोई भी सरकार नहीं समझ पाई.
दोस्तों मैं ना तो कोई नेता, न अभिनेता और न ही किसी बड़े राजनीति की परछाई हूँ, आप ही की तरह एक व्यापारी हूँ, कलम से लिखता हूँ, कलम का सिपाही हूँ.
आपका अपना
गिरीश शर्मा
मो. 9810021510

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